जून में ख़तम होगा कोरोना का प्रभाव

आईआईएन/नई दिल्ली, @Infodeaofficial
गुरु व केतु के योग को गुरु चांडाल योग कहा जाता है। गुरु शनि के योग को ब्रम्हा हत्या योग कहते हैं। ग्रहण के समय जो योग पाँच ग्रहों का योग था व यह साबित करते हैं कि राहु व केतु के धुरी मे इनका उपयोग विदेशी ताकत करेंगे। गुरु ग्रह हिन्दुओ का प्रतिनिधि है। राहू गैरहिन्दू का प्रतिनिधि है जो यह सब कुछ करा रहा है।
कोरोना वायरस कहा से आया और यह लोगों में किस माध्यम से फ़ैल रहा है इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गयी है। लेकिन इस बात की पुष्टि हो चुकी है की यह बीमारी चीन से आयी और विश्वभर में फ़ैल रही है।
चिकित्सा जगत के विशेषज्ञों के मुताबिक यह बीमारी इस बीमारी से ग्रसित लोगों के संपर्क में आने से फैलती है। उनके साथ हाथ मिलाने, उनसे काफी करीब रहने, उनके खांसी और छींक के बूंदों से। या फिर उन गिरे बूँद के किसी अन्य पदार्थ व स्थान पर गिरे होने को छूने की वजह से फैलती है।
चेन्नई के जाने माने ज्योतिष आचार्य महेश वर्मा का कहना है की इन सब में मानव की भूमिका तो है लेकिन इसके साथ इसमें सितारों और गृह नक्षत्रों के फेर से इंकार नहीं किया जा सकता। यह सांस की बीमारी के रूप में मानव शरीर में प्रवेश करता है।
काल पुरूष की जन्मपत्रिका में मानव शरीर का तीसरा घर मिथुन राशि है जो फेफड़ो व श्वास की नली का प्रतिनिधित्व करता है।राहु मिथुन राशि में और बृहस्पति व केतु धनुष राशि में शनि के साथ दर्शाते है कि मानव दुनिया के पूर्वी भाग से शुरू होने वाले फेफड़ों के रोगों से मनुष्य पीड़ित होंगे।
मिथुन राशी दुनिया के पूर्व का प्रतिनिधित्व करती है। ग्रहण जो 26 12 2019 को हुआ था जो रोग और मृत्यु का मुख्य कारण है। यह रोग 29 मार्च 2020 से अपनी शक्ति खो देगा क्योंकि बृहस्पति मकर राशी में प्रवेश करेंगे और इस घातक बीमारी कि गति में कमी होगी।
मकर राशि मे मंगल व शनी के ऊग प्रभाव को रोकेगे और उसके बाद दवा प्राप्त करेगा 14 अप्रैल को सूर्य का मेष राशि में प्रवेश होगा जिससे दुनिया के लोगों को राहत मिलेगी लेकिन यह बीमारी होगी 29 जून तक चलेगी।
हमारे प्रधानमंत्री जी की कुंडली के अनुसार उनकी राशी वृश्चिक है । अभी चन्द्र दशा में शुक्र का अंतर चल रहा हैं और गोचर में बृहस्पति 29 मार्च को उनके तीसरे मे प्रवेश करेगा लेकिन दूसरा और 5 वां घर का स्वामी होने से उन्हें अपने निकट और प्रिय से तनाव होगा। नीति बनाने में वे सहयोग नहीं करेंगे। लेकिन अंत में 29 जुलाई के बाद अधिक शक्तिशाली होंगे और भारत की सभी समस्याओं से निपटेगे
कोरोना वायरस पहली बार दिसंबर में पाया गया था। 26 दिसंबर 2019 को सूर्य ग्रहण हुआ था। उस समय पांच ग्रह शनि बृहस्पति सूर्य केतु और बुध ग्रह के प्रभाव से जनता को बीमारियों से पीड़ित होने का प्रमुख कारण था।
इस मंत्र का जप करने से विश्व में कोरोना से मुक्ति होगी ओर शान्ति का अनुभव होगा। अगर किसी को वायरस होगया है तो आप उनके लिए भगवान शिव के इस मंत्र का जाप भी कर सकते है। ॐ जूं सँ

