चुनावी डिजिटल जंग: तमिलनाडु में AI विज्ञापनों पर अरबों की बौछार

सोशल मीडिया बन गया चुनावी रणभूमि

Ritesh Ranjan/Chennai, @royret

जकल यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम पर चुनावी विज्ञापन की बाढ़ आ गई है। ये क्रिएटिव विज्ञापन आम जनता को टारगेट कर वोटरों को प्रभावित करने के मकसद से बनाए जा रहे हैं। तमिलनाडु भी इससे अछूता नहीं रहा है। इस महीने तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव होने हैं और सभी पार्टियां डिजिटल कैंपेन पर भारी पैसा खर्च कर रही हैं। खास बात ये है कि सत्ताधारी डीएमके इस डिजिटल कैंपेन पर सबसे ज्यादा खर्च कर रही है। इनके विज्ञापन भावुक अपील और सरकार की उपलब्धियों पर केंद्रित हैं – जैसे ‘द्रविड़ मॉडल’ योजनाएं, गरीबों के लिए कल्याणकारी कदम।

AI का कमाल: डिजिटल अवतार से लीडरों की दहाड़

वर्ष 2026 चुनाव में AI का इस्तेमाल चरम पर है। पार्टियां AI-जनरेटेड वीडियो, डिजिटल अवतार और टारगेटेड कंटेंट चला रही हैं। कांग्रेस ने AI मास्कोट ‘रकई’ लॉन्च किया, तो एआईएडीएमके ने 70 सदस्यीय AI टीम बनाई। भाजपा वीडियो ऐड्स पर भारी खर्च कर रही, जबकि अभिनेता विजय की टीवीके युवाओं को लुभाने के लिए ‘MY TVK’ ऐप लॉन्च कर डिजिटल मेंबरशिप बढ़ा रही। तमिलनाडु भारत का सबसे ज्यादा डिजिटल राजनीतिक विज्ञापन खर्च करने वाला राज्य बन गया। 2024 लोकसभा में डीएमके ने गूगल ऐड्स पर 8 करोड़ रुपये उड़ाए, कुल 42 करोड़ का खर्च सभी पार्टियों ने किया।

खर्च का आंकड़ा: डीएमके नंबर वन, बाकी पीछे

वर्ष 2024-25 में तमिलनाडु ने डिजिटल ऐड्स पर 42 करोड़ से ज्यादा खर्च किया। डीएमके की सहयोगी संस्था ‘पॉपुलर एम्पावरमेंट नेटवर्क’ ने तेजी से खर्च बढ़ाया। रिपोर्ट्स के मुताबिक 2026 में डीएमके प्रतिदिन 2 करोड़ विज्ञापनों पर खर्च कर रही। 80% विज्ञापन वीडियो फॉर्मेट में हैं, जो यूट्यूब पर स्टोरीटेलिंग से युवा वोटरों (40% कैंपेन युवाओं पर) को लुभाते हैं। भाजपा ने मेटा पर 24 करोड़ रूपए लगाए है, जबकि एआईएडीएमके इसमें कंजूसी बरत रही है। हाई-टेक कैंपेन रथ – LED स्क्रीन, साउंड सिस्टम वाले सड़कों पर सियासी तकनीकी जंग छेड़ रहे हैं।

युवा वोटरों पर नजर, प्रभावी रणनीति

डीएमके सीएम स्टालिन ने ऑनलाइन मीटिंग में डिजिटल आउटरीच पर जोर दिया, हर बूथ पर 30% मेंबरशिप टारगेट रखा। टीवीके विक्रवंडी रैली में QR कोड से डिजिटल रजिस्ट्रेशन कर रही। ये विज्ञापन इतने आकर्षक हैं कि व्यूअर्स पर गहरा असर डाल रहे। लेकिन सवाल उठ रहा – क्या अत्यधिक खर्च लोकतंत्र के लिए सही? तमिलनाडु की ये डिजिटल जंग 2026 चुनाव का नया अध्याय लिख रही।

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