समुंद्रयान प्रोटोटाइप इस साल, अगले साल मुख्य लॉन्च की तैयारी
एनआईओटी के निदेशक बोले—भारत की ब्लू इकोनॉमी, गहरे समुद्री शोध और स्वदेशी तकनीक भविष्य की बड़ी ताकत बनेंगे

Ritesh rajan,INN/Chennai,@royret
चेन्नई स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशन टेक्नोलॉजी (NIOT) के निदेशक डॉ. बालाजी रामकृष्णन ने कहा है कि समुंद्रयान मिशन का प्रोटोटाइप इस साल के अंत तक तैयार हो जाएगा और उसके बाद विस्तृत परीक्षण के आधार पर अगले साल मुख्य लॉन्च की दिशा तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रोटोटाइप से मिलने वाले परीक्षण परिणाम ही यह स्पष्ट करेंगे कि वास्तविक मिशन को किस स्तर पर आगे बढ़ाया जाए।
डॉ. रामकृष्णन के अनुसार NIOT केवल समुंद्रयान पर ही नहीं, बल्कि समुद्री और महासागरीय तकनीक से जुड़े कई अन्य अहम प्रोजेक्ट्स पर भी काम कर रहा है। उनका कहना है कि भारत का समुद्री क्षेत्र अब केवल अनुसंधान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की आर्थिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। पिछले दो दशकों में पर्यटन, सुरक्षा, व्यापार और समुद्री अनुसंधान जैसे क्षेत्र तेज़ी से बढ़े हैं और यह रफ्तार आने वाले वर्षों में और मजबूत होने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि ब्लू इकोनॉमी यानी समुद्र आधारित अर्थव्यवस्था भारत के लिए एक बड़ा अवसर है। इसमें समुद्री परिवहन, संसाधनों का उपयोग, खनिज, अनुसंधान, सुरक्षा और तकनीकी नवाचार जैसे कई क्षेत्र शामिल हैं। यही वजह है कि समुद्री तकनीक में आत्मनिर्भरता अब भारत की रणनीतिक जरूरत बनती जा रही है।
NIOT के तहत विकसित मात्स्या 6000 मिशन को भी चरणबद्ध तरीके से परखा जा रहा है। अब तक हार्बर परीक्षण पूरा हो चुका है, जबकि अगला चरण आने वाले महीनों में किया जाएगा। 500 मीटर गहराई तक परीक्षण इस वर्ष के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य है। डॉ. रामकृष्णन ने बताया कि भारत 2027 तक 6000 मीटर गहराई तक मानवयुक्त समुद्री अभियान की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जो देश को चुनिंदा वैश्विक गहरे समुद्री अन्वेषण शक्तियों में शामिल कर सकता है।
उन्होंने यह भी जोर दिया कि इतनी बड़ी परियोजनाएं केवल किसी एक संस्था के प्रयास से सफल नहीं हो सकतीं। इसके लिए शैक्षणिक संस्थानों, उद्योगों, स्टार्टअप्स, वैज्ञानिकों और सरकारी संगठनों के बीच मजबूत समन्वय जरूरी है। उनके अनुसार, साझा दृष्टि के साथ काम करने से भारत अंडरवॉटर रोबोटिक्स, स्वदेशी समुद्री सेंसर और ब्लू इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों में वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ सकता है।
समुंद्रयान, मात्स्या 6000 और समुद्री तकनीक से जुड़े ये प्रयास भारत को समुद्र के भीतर की दुनिया में नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

