सिरदर्द बन रहे हैं किशोरों में बढ़ते एचआईवी के मामले

कुल संख्या में गिरावट

किशोरों की संख्या में भारी बढ़ोत्तरी

अमिता शुक्ला त्रीपाठी, आईएनएन/लखनऊ, @Infodeaofficial

चेन्नई. राज्य में पाए गए एचआईवी पीडि़तों के मौजूदा आंकड़े किसी भी आम इंसान से लेकर सरकार तक को चौंकाने के लिए काफी है। मौत का पर्याय बन चुकी एड्स जबीमारी का जैसी बिमारी का नाम सुनकर कइयों के पैरों तले जमीन खीसक जाती है। प्राप्त आकड़ों के मुताबिक पिछले दो साल के दौरान एचआईवी पीडि़त 18 साल से कम उम्र के किशोरों में लगभग 25 फीसदी की कमी आई है।

इतने जागरुकता अभियान के बावजूद इस बिमारी का अभी भी जड़ें जमाए रखना चिंता का विषय बना हुआ है। लाख उपायों के बावजूद इसे पूरी तरह से नियंत्रित नहीं किया जा सका है। राज्य में 2017 में 18 साल से कम उम्र के 236 एचआईवी पीडि़त थे जिनमें से 32 ऐसे थे जिनके स्रोत का कुछ पता नहीं लगा। यह असुरक्षित यौन संबंध का नतीजा है या फिर इनका यौन शोषण हुआ है इसका प्रमाण नहीं होने के कारण यह अधिकारियों के लिए सिरदर्द बनी हुई है। गौरतलब है कि 2015 में 311 बच्चों में एचआईवी के लक्षण पाए गए थे।

इनमें से 289 मामलों में बच्चे मां से संक्रमित थे तथा 22 बच्चों के संक्रमण के स्रोत का पता नहीं चल पाया था। हालांकि इसके दो साल बाद 2017 में तमिलनाडु राज्य एड्स नियंत्रण समिति की ओर से जारी आंकड़ों में एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों की संख्या तो 25 प्रतिशत घट गई थी। ऐसे मामलों की संख्या लगभग एक चौथाई बढकऱ 32 हो गई जिनके कारणों का पता नहीं चल सका था। 2015 में जहां यह संख्या 6234 थी वहीं इस साल बढकऱ 8871 पर पहुंच गई है।

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