कोरोना ने बढ़ाई बेरोजगारी व महगाई

विष्णुदेव मंडल, INN/Chennai, @Infodeaofficial
कोरोना महामारी ने कइयों का रोजगार छीना और इस महामारी के कारन बढ़ी महगाई ने बहुतों को भूखों मरने पर मजबूर कर दिया है। पहले भूख और रोजगार की तलाश में लोगों को दर दर भटकना पद रहा है।
कई प्रवासी मजदुर प्रदेश छोड़ अपने गृह प्रदेश चले गए लेकिन अभी भी कई है जो यहाँ जीवन दुबारा शुरू करने का प्रयाश कर रहे है।
आमदनी भी नहीं और दूसरी ओर महगाई भी लोगों की जान लेने पर तुली हुई है। बाजार में हींग से जीरा, तेल से दाल, फल से सब्जी हर चीज महंगी हो गयी है। ऐसे तंगी के माहौल में लोग रोजगार के लिए सैकड़ों की दुरी तय कर रोजगार की तलाश कर रहे है।
गौरतलब है की एम रामराज नाम का एक व्यक्ति उधमल्पेट से चेन्नई 200 किलोमीटर यात्रा 6 दिनों में पूरा कर चेन्नई केवल काम तलाशने आया। वह बताता है की इस कोरोना संकटकाल में उनका ड्राइवरी का काम छीन गया। उसके परिवार में बीवी और दो बच्चे है। उसके पास खाने को पैसे नहीं न ही माकन का किराया देने को इसलिए काम की तलाश में वह चेन्नई आया है।
कुछ ऐसे ही कहानी रौनक झा की है जो पिछले 1 महीने से बेरोजगार हैं उन्होंने काम के लिए कई जगह आवेदन दिया लेकिन अब तक उनको काम नहीं मिला है।
एक मालवाहक कंपनी में काम कर चुके डाटा ऑपरेटर सतीश कन्नन बताते हैं के पिछले 3 महीनों से वह बेरोजगार बैठे हुए हैं। अब तक कई कंपनियों में बायोडाटा भेज चुके हैं लेकिन कहीं से बुलावा नहीं आया है।
एक लॉजिस्टिक कंपनी में बतौर क्लर्क काम कर रही दीप्ति बताती है मार्च महीने से उनके कंपनी ने उनका वेतन भुगतान नहीं किया है। कंपनी का मालिक हर बार कोई न कोई बहाना बनाकर बात ताल जाता है। जबकि घर की माली हालत बहुत ही खराब है।
एक लॉजिस्टिक कंपनी के प्रबंधक ने बताया की उनके साथ लगभग 2 दर्जन से अधिक मजदूर और कर्मचारी काम करते थे। पिछले मार्च में कंपनी ने आधी सैलरी दी थी, अप्रैल महीने में पूर्ण लाक डाउन होने के कारण कंपनी ने अब तक किसी को एक पैसे मदद नहीं दी है। मई महीने का भी वेतन अभी तक नहीं डाला गया है। मजदूरों को खाने पीने का संकट उत्पन्न हो गया है, वह भूखे पेट काम करना नहीं चाहते। कंपनी के मालिकों तनख्वाह देने से इंकार कर रहे हैं।
समाजसेवी पंकज कुमार झा बताते हैं की उनके पास भी 2 दर्जन से अधिक कर्मचारी काम करते हैं लेकिन पिछले 3 महीनों से वह अपने कर्मचारियों की देखरेख कर रहे हैं लेकिन कामकाज ठप होने के कारण आने वाले समय में वह अपने कर्मचारियों को मदद कर पाएंगे या नहीं इसपर संशय है।

