मै चाहता हुं हमारी भावी पिढ़ी मेें पढऩे की आदत वीकसित हो

रीतेश रंजन, आईआईएन/चेन्नई, @Infodeaofficial
मै चाहता हुं कि हमारी भावी पिढ़ी में पढऩे की लत लगे और कोई भी हमारे गांव में अनपढ़ न रहे। यह कहना है तमिलनाडु के तुतिकोरिन के हेयर ड्रेसर पी. पोनमारिअप्पन का।
इंफोडिया टीम ने उनसे जब बात की तो तो उन्होंने बताया कि उन्हें पढऩे की काफी लालसा थी लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्हें पढ़ाई बीच में ही छोडऩी पड़ी।
पोनमरिअप्पन ने पढ़ाई छोडऩे के बाद कई जगह कभी शिपिंग कंपनी में तो कभी किसी और जगह काम किया लेकिन कहीं भी उनका दिल नहीं लगा।
उन्होंने वर्ष 2014 में तुतिकोरिन में हेयर ड्रेसिंग की दुकान शुरू की। यहां उन्होंने दुकान में अपने ग्राहकों के लिए टीवी आदि कई सुविधाएं लगा रखी थी। उनकी दुकान में ज्यादातर बच्चे आते थे अपने अभिभावकों के साथ।
अपनी पारी आने तक इन बच्चों का ज्यादा ध्यान टीवी पर लगा रहता था इसलिए उन्होंने सोचा कि क्यों न दुकान में कीताबे रखीं जाय जिससे की इन स्कूली बच्चों में पढऩे के प्रति इच्छा जागे।
तबसे उन्होंने अपने दुकान में पुस्तकें रखनी शुरू कर दी। पहले तो उन्होंने चार पुस्तकों से इसकी शुरूआत की बाद में इनका हाथ बढ़ाने के लिए कई लोग सामने आए।
स्मार्टफोन के इस दौर में जहां लोग अपना अधिकांश समय मोबाइल फोन में बीताते हैं वह पोनमारिअप्पन के इस प्रयास को लेकर थेड़े उखड़े-उखड़े रहते हैं।
लेकिन उन्होंने इसका भी हल निकाल लिया। जो भी बच्चा उनकी दुकान में कीताबे पढ़ता है उसके लिए उन्होंने दुकान में एक रजीस्टर रखा हुआ है और बच्चों से कीताबे पढऩे के बाद रजीस्टर में अपना नाम, स्कूल का नाम, पुस्तक का नाम, पेज नम्बर लिख कीताब का सारांस लिखने को कहते हैं और अच्छा सारांस लिखने वाले को अपनी ओर से सम्मानित करते हैं। वह कहते हैं कि इससे बच्चों में पढऩे को लेकर रुचि जागेगी।
पोनमरिअप्पन के परिवार में उनके पिता हैं जो दिहाड़ी मजदूर का काम करते हैं। उनकी माता और पत्नी कुशल गृहणी हैं। उन्हें तीन बच्चें है। परिवार का जीवन यापन इसी दुकान की कमार्ई से चलता है।
जिंदगी पोनमारिअप्पन के लिए अभी भी सरल नहीं है लेकिन इससे उनका हौसला कभी कम नहीं हुआ। वह चाहते हैं कि गांव के बच्चों के लिए एक बड़ा सा पुस्तकालय का निर्माण करें जिसमें गांव के बच्चों के पढऩे के लिए हर प्रकार कीताबें रहें।

