नियमों को ताक पर रखकर चहेतों को मिल जाती है पदोन्नति

विष्णु शर्मा, आईआईएन/चेन्नई, @Svs037

छोटे-बड़े पदों के प्रमोशन में धांधली और नियमों की अनदेखी कई सरकारी बैंक कर्मचारियों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। सूत्रों के मुताबिक देना बैंक के करीब 150 से ज्यादा कर्मचारियों को जरूरी योग्यता होने के बावजूद पदोन्नत नहीं किया गया है।

बैंक के एक कर्मचारी ने अपना नाम नहीं बताने की शर्त पर इंफोडिया को बताया कि कुछ महीने पहले पदोन्नति के लिए साक्षात्कार लिया गया जो स्केल चार—पांच, स्केल पांच—छह और छह—सात के लिए था। 30 मार्च को हुई परिणामों की घोषणा चौंकाने वाली थी क्योंकि पदोन्नति में जिन दिर्शा-निर्देशों का पालन करना आवश्यक था उनको दरकिनार कर कई ऐसे लोगों को पदोन्नत किया गया जो इसके योग्य नहीं थे।

बैंक के दिशा-निर्देश के अनुसार स्केल पांच में पदोन्नत होने के लिए प्रत्याशी को कम से कम तीन साल के लिए शाखा प्रमुख के तौर काम करने का अनुभव होना चाहिए लेकिन नियम को ताक पर रखते हुए बैंक के बड़े अधिकारियों ने अपने चहेतों को पदोन्नत कर दिया। कई ऐसे लोगों को पदोन्नत किया गया जिन्हें शाखा प्रमुख का जरूरी अनुभव नहीं था।

एक अन्य दिशा-निर्देश के मुताबिक स्केल पांच पर पदोन्नति के लिए बैंककर्मी के पास 12 साल सेवा का अनुभव होना आवश्यक था, उसकी भी अनदेखी की गई। देना बैंक में हाल की पदोन्नति इन नियमों को ताक पर रखकर की गई है।

एक उम्मीदवार की दो बार पदोन्नति इन नियमों की अनदेखी कर की गई। बैंककर्मी ने बताया कि बैंक के सीएमडी के साथ अच्छे संबंध के कारण इन नियमों की अनदेखी कर यह पदोन्नति दी गई। अगर बैंक के पास योग्य उम्मीदवारों की कमी होती है तभी इन नियमों में छूट का प्रावधान है लेकिन योग्य उम्मीदवारों की अच्छी—खासी संख्या होने के बावजूद सीएमडी ने अपने चहेतों को पदोन्नत कर दिया।

यह धांधली केवल देना बैंक में ही नहीं हुई बल्कि कई अन्य बैंकों में भी हुई है जिनमें एक मामला बैंक ऑफ इंडिया का भी है। बैंक में पदोन्नति की यह धंधली मुख्य कार्यकारी अधिकारी और उनके कुछ साथियों की मिलीभगत से की गई है। यह मामला जून महीने में उजागर हुआ।

पदोन्नति की यह सूची ऑनलाइन साक्षात्कार के बाद तैयार की गई। यह पदोन्नति स्केल-चार से स्केल-पांच के लिए हुई। सूत्रों का कहना है कि पदोन्नति की सूची में जिन लोगों का नाम आया उसमें ुख्य कार्यकारी अधिकारी के सभी करीबियों के नाम थे। यही नहीं जिन लोगों ने पदोन्नति के लिए पैसे दिए बाद में उनका भी नाम सूची में जोड़ दिया गया।

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