एनआरसीसी के विरोध में रंगोली बनाने पर पांच महिलाओं को पुलिस ने किया गिरफ्तार

रीतेश रंजन, आईआईएन/चेन्नई, @Infodeaofficial 

मुझे आज से पहले कभी ऐसा नहीं लगा कि रंगोली बनाना भी गैरकानूनी है। घरों के आगे रंगोली बनाना और सजाना यह तमिलनाडु की परम्परा में शामिल है लेकिन लगता है तमिलनाडु सरकार द्रविड़ संस्कृति को भूल मनुवादि संस्कृति से ज्यादा प्रभावित है यह जताने में लगी हुई है।

रंगोली बनाकर नागरिकता अधिनियम के खिलाफ विरोधी जताने वाली पांच महिलाओं को पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने वाले प्रक्रम पर अपनी ओर से प्रतिक्रिया देते हुए तमिलनाडु के तुतिकोड़ी से डीएमके की संसद कनीमोझी ने कहा कि मौजूदा केंद्र और राज्य सरकार केवल अपनी वाहवाही सुनना चाहती है उन्हें विरोध का स्वर पसंद नहींं।

जो काई भी व्यक्ति, संस्था व संगठन विरोध का स्वर उठाता है सरकार उसे दबाने का प्रयास करती है। रविवार के दिन शांतिपूर्ण और कलात्मक रवैये से अपना प्रदर्शन करने वाली पांच महिलाओं की गिरफ्तारी इसका जीवंत उदाहरण है।

गौरतलब है कि रविवार को चेन्नई के बेसंट नगर इलाके में रविवार की सुबह कुछ महिलाओं ने रंगोली बनाकर नागरिकता अधिनियम के खिलाफ प्रदर्शन करने चाली महिलाओं को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इस घटना की खबर सोशल मीडिया मेें जंगल की आग की तरह फैल गई और विपक्षी पार्टियों ने इस घटना का जमकर विरोध किया। हालांकी इन महिलओं को बाद में रिहा कर दिया गया लेकिन तमिलनाडु के राजनैतिक गलियारों में यह घटना पूरे दिन छाई रही।

डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने इस घटना की नींदा की। स्टालिन ने ट्वीट कर कहा कि यह निरंकुशता का अधिनायकवाद है जो एआईएडीएमके की सरकार में दिनों दिन बढ़ता जा रहा है। महिलाओं की गिरफ्तारी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कानून का उल्लंघन है।

संविधान ने जो व्यक्ति को आजादी दी है उसका उल्लंघन है। वाइको ने इस घटना के तुुरंत बाद राज्य सरकार पर भड़कते हुए कहा कि गिरफ्तार महिलाओं को सरकार तुरंत रिहा करे।

सरकार अगर जनता के साथ ऐसा करेगी तो उन्हें उनके कोप का भाजन बनने को भी तैयार रहना चाहिए। विद्यार्थी और आम जनता सीएए और एनआरसी के विरोध में सड़कों पर उतर आई है। उनके इस आक्रोष को हल्के में नहीं लेना चाहिए। 

 

इस संबंध में पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी जिसे स्वीकृति नहीं मिली थी।

सड़क पर कोल्लम बनाने के कारण यातायात व्यवस्था बाधित हो रही थी इसलिए इन लोगों को पहले वहां से हटने को कहा गया। बात नहीं मानने पर इनलोगों की गिरफ्तारी की गई, जिन्हें बाद में रिहा कर दिया गया।

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