वर्धमान रेलवे स्टेशन का नाम वर्धमान ही रहेगा

रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल ने ललित गांधी को दिया आश्‍वासन

संजय जोशी, आईआईएन/बेंगलूरु, @Infodeaofficial 
श्‍चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित तथा जैन धर्म के 24 वें तीर्थंकर भगवान महावीर के नाम पर जाना जाने वाले वर्धमान शहर के वर्धमान रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर बटुकेश्‍वर रखे जाने की खबरों से देश भर के धर्मावलंबियों में गहरा रोष व्याप्त हो गया।
इस मुद्दे की गम्भीरता को ध्यान में रखते हुए अखिल भारतीय जैन अल्पसंख्यक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललित गांधी, संगठन के राष्ट्रीय महासचिव संदिप भंडारी अपने प्रतिनिधमंडल के साथ अविलम्ब दिल्ली पहुँचे और उन्होंने रेल मंत्री पीयुष गोयल से मुलाकात की व वर्धमान रेलवे स्टेशन का नाम बदले जाने के विषय में ध्यान आकर्षित कराया।
ललित गांधी ने कहा की, वर्धमान रेलवे स्टेशन का नाम जैन धर्म के 24 वें तीर्थंकर भगवान महावीर की स्मृतियों से जुडा हुआ है। क्यों की भगवान महावीर का धर्म के प्रचार प्रसार के सिलसिले में वर्धमान नगर में आवागमन बना रहता था। गोयल ने ललित गांधी द्वारा प्रस्तुत की गई भावना को ध्यान में रखते हुए आश्‍वस्त करया कि भारतीय रेल मंत्रालय वर्धमान रेलवे स्टेशन का नाम यथावत ही रखेगा व किसी तरह का बदलाव नही किया जाएगा।
पीयुषजी गोयल के इस आश्‍वासन पर ललित गांधी व संदिप भंडारी ने पीयुषजी गोयल के प्रति आभार प्रकट किया। प्रतिनिधीमंडल में दिल्ली के प्रदेशाध्यक्ष जे. के. जैन, राजॠषी शर्मा भी उपस्थित थे।
पीयुष गोयल द्वारा ललित गांधी को दिए गए स्पष्टीकरण से देश भर के जैन समुदाय में संतोष की लहर फल गई व जैन धर्मावलंबियों ने ललित गांधी द्वारा जागरूकता पूर्वक व त्वरित उठाये कदमों की भूरी भूरी प्रशंसा की व उनके प्रति आभार प्रकट किया। ये उल्लेखनीय है कि अतीत में भी सम्मेत शिखर जी, पालीताणा, नाकोडा, केशरिया जी आदि तीर्थों पर जब जब भी कोई विवाद या संकट खडा हुआ तो अखिल भारतीय जैन अल्पसंख्यक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललित गांधी ने पूर्ण जागरूकता के साथ उस मसले का हल निकलाया।
जहां तक वर्धमान शहर के अतीत का प्रश्‍न है तो वर्धमान भारतीय राज्य पश्‍चिम बंगाल का एक भूतपूर्व जिला था, जिसे 7 अप्रैल 1917 में पूर्व वर्धमान व पश्‍चिम बंगाल जिलों में विभाजित कर दिया था। मुगलकाल में इसका नाम शरीफबाद हुआ करता था। बाद में वर्धमान नाम भगवान महावीर के उपनाम के आधार पर रखा गया। 

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