तमिल व संस्कृत दोनों भाषाओं में होगा तंजावुर के बृहदीश्वरा मंंदीर में महाकुंभ अभिषेकम की विधि को तमिल और संस्कृत दोनों भाषा में होगी

रीतेश रंजन, आईआईएन/चेन्नई, @Royret

मिलनाडु सरकार ने मद्रास हाईकोर्ट के मदुरई बेच को यह बताया है कि तंजावुर के बृहदीश्वरा मंदीर में होने वाले महाकुंभ अभिषेकम की विधि को तमिल और संस्कृत दोनों भाषा में किया जाएगा।

राज्य सरकार ने अपनी ओर से दायर जवाबी हलफनामे में कोर्ट को बताया है कि कुम्भअभिषेकम की विधि में तमिल को प्रमुखता दी जाएगी लेकिन कुंभअभिषेकम के सभी विधि-विधान को तमिल और संस्कृत दोनों भाषाओं में किया जाएगा၊

राज्य सरकार ने अपनी ओर से दायर याचिका में बताया है कि यज्ञ, महा अभिषेकम और तिरुमुैरै पारायणम की विधि को तमिल में किया जाएगा।

जो व्यवस्था वर्ष 1980 और 1997 में अपने गयी थी, उसी व्यवस्था को इस बार भी लागू किया जाएगा। न्यायाधीश एम दुरैस्वामी और टी रविचंद्रन की बेंच ने मामले की अगली सुनवाई बुधवार को होगी।

इस सम्बन्ध में चेन्नई के संस्कृत कॉलेज के प्रिंसिपल राधाकृष्णन का कहना है की इस मंदिर का निर्माण हज़ारो साल पहले प्रदेश और प्रदेश की जनता की भलाई के लिए किया गया था।

बहगवां की पूजा अर्चना के लिए जिन मंत्रो का प्रयोग किया जाता है वह उसके गलत उच्चारण से भगवन कुपित भी हो सकते है। इसलिए हमें इन व्यर्थ के झंझट में फसने के बजाय पूजा के उद्देश्य पर ध्यान देना चाहिए बजाय इसके विधि के।

वही संस्कृत के शोधार्थी रामकृष्णन का कहना है यह कोई फिल्म नहीं जिसे अन्य भाषा में डब कर लोगो के समक्ष उनके मनोरंजन के लिए प्रस्तुत कर दिया जाया। यह एक पौराणिक व्यवस्था है जो काफी सालो से चली आ रही है। हमे इसमें किसी प्रकार का छेड़ छाड़ नहीं करना चाहिए।

गौरतलब है की तंजावुर के सेंथिलनाथन ने मद्रास हाई कोर्ट के मदुरै बेंच में याचिका दायर कर मांग की कुम्भ अभिषेकम की विधि को तमिल भाषा में किया जाया। इस मंदिर का निर्माण राजा राज चोला ने 1,100 पहले किया था।

5 फरवरी को मंदिर में महाकुम्भ अभिषेकम होना है। यह विवाद तब खड़ा हुआ जब डीएमके प्रमुख एम के स्टालिन ने इस पुरे कार्यक्रम को संस्कृत में करने के बजाय तमिल में करने की गुजारिस की।

इस विषय पर राज्य के तमिल आधिकारिक भाषा के मंत्री माँ फोई पंडीराजन ने कहा की इस बात में कोई दो राय नहीं की कुम्भ अभिषेकम की प्रक्रिया में तमिल को प्रमुखता दी जाएगी लेकिन जो परम्परा सदियों से चली आ रही है हम उसे छोड़ नहीं सकते।

इसलिए मंदिर में कुम्भ अभिषेकम की विधि तमिल और संस्कृत दोनों भाषाओँ में होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *