कभी सूखा तो कभी पतझर बहार

विष्णुदेव मंडल, INN/Chennai, @Infodeaofficial
तमिलनाडु में आमतौर पर सूखे की स्थिति बानी रहती है और यही कारन है तमिलनाडु और उसके पडोसी राज्यों में पानी को लेकर हमेशा कोई न कोई विवाद चलता रहता है।
हा लेकिन यह स्थिति हमेशा नहीं रहती है कई बार तो यहाँ इतनी बारिश होती है की पूरा प्रदेश जलमग्न हो जाता है।
आपको याद होगा पिछले साल खासकर के मई और जून महीने में चेन्नई महानगर भयंकर जल संकट से जूझ रहा था। महानगर के सभी प्रमुख जलाशय लगभग सुख चुके थे।
तमिलनाडु सरकार व पीडब्ल्यूडी विभाग को चेन्नईवासियों की प्यास बुझाने के लिए हर दिन कुछ ना कुछ नए तरकीब ढूंढनी पड़ती थी। जल संकट इस कदर इस तरह कोहराम मचा रहा था की आमजन हमेशा पानी से भरा टैंकर के पीछे भागते नजर आते।
लेकिन इस बार स्थित बिल्कुल अलग है, महानगर के चारों जलाशयों में पानी उपलब्ध है, चेन्नई रेडहिल्स सरोवर पानी उफान मर रही है। हालाँकि इस सरोवर के आस पास रहने वाले लोग पानी के लिए मारे-मारे फिर रहे हैं। लेकिन तमिलनाडु सरकार और पीडब्ल्यूडी विभाग के कानों पर जूं नहीं रेंग रही।
महानगर वासियों को पानी के लिए दर-दर भटकना पड़ता है। इंफोडिया ने पिछले साल और इस साल के तुलनात्मक फोटो द्वारा तमिलनाडु सरकार का ध्यान आकृष्ट कराना चाहता है की जब पिछले साल सभी सरोवर सुख चुके थे उस समय भी मेट्रो वॉटर की सप्लाई 1 दिन बाद किया जाता था लेकिन इस बार सभी सरोवर में पानी भरे होने के बावजूद भी आमजन के आवश्यकता की पूर्ति के लिए पानी क्यों नहीं छोड़ी जाती है ?

पानी लेने के लिए लोग लम्बी लम्बी कतारों में खड़े रहते है और इसमें किसी प्रकार का सोशल डिस्टन्सिंग का पालन नहीं किया जाता है। यह महानगर में कोरोना संक्रमण को और बढ़ाएगा।
स्थानीय लोगों का कहना है की जब सरोवर में भारी मात्रा में पानी है तो सरकार को पानी छोड़ने में गुरेज क्यों है?

