भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण चेन्नई एयरपोर्ट पर करेगा वर्षाजल संचयन
इंजीनियरों को प्रशिक्षण देना शुरू किया

विष्णु शर्मा, आईआईएन/चेन्नई, @svs037
गिरते भूजल स्तर और पेयजल संकट को देखते हुए मानसून शुरू होने से पहले भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) ने चेन्नई हवाईअड्डे पर अपने इंजीनियरों को वर्षाजल संचयन का प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया है।
एएआई द्वारा हवाईअड्डे के 1,301.28 एकड़ के कम्पाउंड की नालियों से निकलने वाले वर्षाजल का संचयन करने का विचार बनाया जा रहा है। इन नालियों के जरिए आसपास के इलाकों का वर्षा जल अडयार नदी में जाता है। सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड जो प्रशिक्षण का आयोजन कर रहा है, भूजल स्तर पर अध्ययन कर भूजल पुनर्भरण का समाधान निकाल कर आगामी 10 दिन के अंदर रिपोर्ट पेश करेगा।
एयरपोर्ट के निदेशक एस.श्रीकुमार ने बताया कि एयरपोर्ट के साथ आसपास के इलाकों के भूजल स्तर और पानी की गुणवत्ता में सुधार के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। इससे जलस्तर में वृद्धि होगी और पानी का खारापन दूर होगा।
उन्होंने बताया कि एक अध्ययन की आवश्यकता है क्योंकि नालियां परिचालक क्षेत्र में हैं जहां पर रनवे और टैक्सी-वे स्थित है।
इसके अलावा वर्षाजल संचयन के लिए भी अध्ययन जरूरी है। रिचार्ज कुओं में जाने वाले पानी की गुणवत्ता में सुधार के लिए एएआई द्वारा फिल्टरिंग सिस्टम की भी योजना बनाई जा रही है।
उन्होंने बताया कि हवाईअड्डे के अंदर स्थित सात से आठ बोरवेल का पानी खारा है, पर कुएं का पानी मीठा है। हवाईअड्डे पर दैनिक आधार पर कम से कम 10 से 12 लाख लीटर पानी की आवश्यकता होती है।
अंदर लगे बोरवेल, खुले कुएं और सरकार द्वारा सरवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की जलापूर्ति से यह जरूरत पूरी होती है। बोरवेल का पानी खारा होने की वजह से उसका आरओ प्लांट में सफाई के बाद इस्तेमाल होता है।
इसके अलावा 50 प्रतिशत पानी की जरूरत सरकार द्वारा की जाने वाली आपूर्ति से पूरी होती है। एएआई ने भविष्य में इसे कम करने की योजना बनाई है।

