बीकानेर में अंतर्राष्टीय संगोष्ठी 13 से

कला, संगीत में आए बदलावों तथा समाज पर उनके प्रभाव पर चर्चा के लिए देश-विदेश के 70 बुद्धिजीवी जुटेंगे

संजय जोशी, आईआईएन/बीकानेर, @Infodeaofficial 
देशभर में कला, संगीत में आए बदलावों तथा समाज पर उनके प्रभाव पर विवेचना करने के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेश से 70 से अधिक बुद्धिजीवी राजस्थान के बीकानेर में त्रिदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में जुटेंगे।
संयोजिका डॉ. दिव्या जोशी ने बुधवार को एक पत्रकार सम्मेलन में बताया कि सिजुरे कलेक्टिव सोसायटी की लालगढ़ पैलेस में 13 से 15 सितम्बर तक आयोजित होने वाली संगोष्ठी में भारतीय मूल के संस्कृति विशेषज्ञ होमी भाभा द्वारा प्रतिपादित कल्चरल ट्रांसलेशन का मत पर चिंतन तथा विमर्श के माध्यम से प्रक्रिया को समझने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि भारत के संदर्भ में राष्ट्रीय स्तर पर यह मत तथा इससे जुड़े शोध एवं प्रयास अत्यंत प्रासंगिक है, क्योंकि यहां प्राचीन स्थानीय संस्कृति का परिरक्षण, विदेशी संस्कृतियों का विलयन तथा नयी संस्कृतियों का सृजन निरंतर हजारों वर्षों से चल रहा है।
सोसायटी इस तरह के अकादमिक विमर्शों के माध्यम से कला एवं साहित्य में शोध को बढ़ावा देने तथा रचनात्मक लेखन, संगीत, चलचित्र, छायाचित्र, कला प्रदर्शनियों के माध्यम से कलाओं के पुनरुत्थान के प्रयोजन को सार्थक रुप देने के लिए प्रयासरत है। डॉ. जोशी ने यह भी बताया कि तीन दिवसीय संगोष्ठी में देश विदेश के 70 से अधिक बुद्धिजीवी विमर्श, प्रदर्शन, साक्षात्कार, कार्यशाला के माध्यम से ज्वलंत विषयों पर परिचर्चा करेंगे।
साथ ही कला एवं संगीत कार्यशालाओं को समावेश करने के उद्देश्य राजस्थान की प्राचीनतम चित्रकला विधि, फड़ चित्रकारी तथा फड़ प्रस्तुतीकरण को युवाओं तक पहुंचाना है।
संगोष्ठी में प्रसिद्ध फड़ चित्रकार सत्यनारायण जोशी की ओर से कलाप्रेमियों को इस प्राचीन/समृद्ध तथा लुप्त होती परम्परा से परिचित करवाया जाएगा। इस पत्रकार सम्मेलन में डॉ. प्रशांत बिस्सा, नीतू बिस्सा, श्वेता, गोविंद सिंह भी मौजूद थे।

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