दुशमन को छकाने के लिए हमारे तरकश में कई तीर: जनरल रावत

यंग लीडर्स ट्रेनिंग विंग (वाईटीडब्ल्यू) का उद्घाटन किया

विष्णु शर्मा, आईआईएन/चेन्नई, @svs037 

म दुशमन को छका कर हराना और धूल चटाना चाहते हैं और इसके लिए हमारे पास एयर स्ट्राइक जैसे कई तीर हमारे तरकश में है। भारत देश की सीमाएं सेना के हाथों में सुरक्षित हैं और अगर कोई भी इसकी सरहदों पर या सीमा के अंदर गलत हरकत करने की कोशिश करता है तो सेना उससे निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

देश के उत्तरी और पश्चिमी सीमा में पड़ोसी देशों की वजह से माहौल बिगड़ा हुआ रहता है। अगर किसी भी प्रकार की कोई हरकत होती है तो उससे निपटने के लिए हमारे पास बालाकोट जैसी एयर स्ट्राइक के अलावा भी कई और ऐसे प्रयास हैं जिनसे हम दुश्मन के दांत खट्टे कर सकते हैं।

चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (ओटीए) में सोमवार को यंग लीडर्स ट्रेनिंग विंग (वाईटीडब्ल्यू) का उद्घाटन करने के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए थलसेना अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत ने कहा भारत शांतिप्रिय देश है लेकिन अगर कोई हमें छेड़ता है तो हम उसका करारा जवाब देने से चूकेंगे नहीं।

जम्मू-कश्मीर की स्थिति पर पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए रावत ने कहा घाटी में हालात पहले से काफी सुधर चुके हैं। वहां अब दुकानें खुलने लगी हैं लोग अपने रोजमर्रा के उपयोग का सामान ले रहे हैं।

उन्होंने कहा घाटी में स्थिति अस्त-व्यस्त बताने वाले लोग या तो घाटी का भला नहीं चाहते या फिर आतंकी गुट के सर्मथक हैं। सर्जिकल स्ट्राइक जैसे अन्य हमले भविष्य में होने के आसार के बारे में पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए रावत ने कहा हम यह अभी से क्यों बता दें कि ऐसी कोई सर्जिकल स्ट्राइक होगी या नहीं, हम इससे अलग और कोई अभ्यास कर सकते हैं जिसके बारे में दुश्मन सोच भी न पाए।

सेवारत सैनिक बन सकेंगे अधिकारी

सेना में काम कर रहे हैं कई ऐसे जवान हैं जो मजबूरी या किसी अन्य वजह से सेना में भर्ती हुए होंगे। कइयों के घर में पढ़ाई के लिए आर्थिक स्थिति सही नहीं होगी इसलिए भी वे सेना में भर्ती हुए होंगे। सेना में भर्ती हुए ऐसे लोगों में कौशल की पहचान कर उनको यंग लीडर्स ट्रेनिंग विंग के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जाएगा।

इस प्रशिक्षण के बाद वे सैनिक अधिकारी बन सकेंगे। यह विंग फौज में सेवारत जवानों को प्रशिक्षण देकर जूनियर कमीशन्ड ऑफिसर्स और नॉन कमीशन्ड ऑफिसर्स  बनाएगा। जंग और जंग के हालात में कैसे और क्या किया जाय जवानों में यह निर्णय लेने की क्षमता होनी चाहिए और अपने साथ की टीम का नेतृत्व कर कैसे लक्ष्य हासिल किया जाय इस बारे में जवानों को इस कार्यक्रम के तहत सिखाया जाएगा।

जिन जवानों में अधिकारी बनने की इच्छा है वह इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का हिस्सा बन सकते हैं। भारतीय सेना ब्रिटिश काल के नियमों और परम्पराओं का पालन करती आ रही है, जिसके तहत ऑफिसर्स और सैनिकों का प्रशिक्षण अलग-अलग होता है।

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