न्यायालय ने दी तमिलनाडु में भाषाई अल्पसंख्यक स्कूलों को तमिल भाषा की परीक्षा से छूट

विष्णु शर्मा, आईआईएन/चेन्नई, @svs037
भाषाई अल्पसंख्यक छात्रों को राहत देते हुए मद्रास उच्च न्यायालय ने दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों को तमिल भाषा का पेपर लिखने की वर्ष 2022 तक छूट दी है।
राज्य के विभिन्न भाषाई अल्पसंख्यक स्कूलों द्वारा दायर याचिकाएं न्यायाधीश एस. मणिकुमार, जस्टिस अब्दुल कुद्दोस और सुब्रमण्यम प्रसाद की पूर्ण पीठ के समक्ष प्रस्तुत की गई तो पीठ ने ये छूट दी है।
पीठ ने हालांकि राज्य सरकार के 18 सितंबर 2014 के उस आदेश को रद्द करने से इनकार कर दिया जिसमें राज्य के सभी स्कूलों को तमिलनाडु लर्निंग एक्ट 2006 के दायरे में लाया गया था, जिसके आधार पर तमिल भाषा का पेपर लिखना अनिवार्य है।
अब छात्रों को वर्ष 2023 में तमिल भाषा की परीक्षा देनी होगी। ज्ञातव्य है कि उच्च न्यायालय 2016 से हर साल यह छूट दे रहा है।
सोमवार को जस्टिस मणिकुमार की अध्यक्षता वाली पूर्ण पीठ के समक्ष वरिष्ठ वकील एम. रविन्द्रन ने बताया कि यह कानून 2006 में बनाया गया था लेकिन इसे 2014 में ही लागू किया गया था। इस निर्णय के बारे में स्कूलों को उस साल जून माह में सूचित किया गया था।
उन्होंने कहा कि स्कूलों में तमिल शिक्षकों की नियुक्ति रिट याचिकाएं दायर करने के बाद की गई थी। भाषाई अल्पसंख्यक संस्थानों के लिए तमिल भाषा नई है।
चूंकि इन संस्थानों में शिक्षा का माध्यम उर्दू या अरबी होता है, छात्रों को तैयार करने के लिए थोड़ा अधिक समय दिया जाना चाहिए।

