कोरोना ने तोड़ दी कमर: एक पिता व कूक की हृदयविदारक गाथा

आईआईएन/चेन्नई, @Infodeaofficial
कोरोना महामारी के कारण पिछले 24 मार्च को प्रधानमंत्री मोदी ने देश भर में लॉक डाउन की घोषणा कर दी। इसकी घोषणा के बाद से कई लोगों का जीवन अस्त व्यस्त हो गया। इनमें सबसे ज्यादा प्रभावित लोगों में प्रवासी मजदूर, मध्यम और निम्न वर्ग के लोग हैं।
इस लॉक डाउन के कारण कईयों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा, कईयों को मेहनत करने के बाद भी उनका मेहनताना नहीं मिला। कितने ऐसे व्यवसायी थे, जिनकी पूंजी और माल दोनों बाजार में ही फंसी रह गई।
इस लॉक डाउन ने समाज के हर वर्ग के लोगों को प्रभावित किया है। जिन लोगों का गुजर-बसर रोजमर्रा की कमाई पर ही निर्भर करता है उनपर लॉक डाउन की गंभीर मार पड़ी है। ऐसे ही सताए लोगों में एक व्यक्ति संतोष भी है।
बिहार का रहने वाला संतोष चेन्नई अच्छी कमाई करने के उद्देश्य से 2011 आया था। संतोष यहाँ एक प्रोफेशनल कूक का काम करता है जो लोगों के घर में जा जाकर खाना बनाने का काम करता है।
जब से लक डाउन की घोषणा हुई उसे भी उसके मालिकों ने काम पर आने से मना कर दिया। अब बैठे बैठे कहीं से कोई आमदनी साधन नहीं। वह यहां अपनी बीवी और तीन बच्चों के साथ रहता है। ऐसे में लॉक डाउन उसपर पहाड़ की तरह उस पर टूट पड़ा।
परिवार का भरण पोषण करना उसकी ही जिम्मेदारी है। उसपर से मकान का किराया व अन्य खर्च। वहीं उसके पास ना तो कोई ऐसा साधन था जिससे कि वह घर वापस लौट सकें।
लेकिन संतोष ने भी हार नहीं मानी, उसने अपने घर के आगे ही समोसा, कचोरी, चाट की दुकान लगाना शुरू कर दिया। पहले कुछ दिनों तक तो यह दुकान अच्छी तरीके से चला, अच्छी कमाई भी हुई। लेकिन पास के इलाके में कोरोना संदिग्ध के पाए जाने के बाद उसने यह धंधा भी बंद कर दिया।
संतोष कहता है कि जिस प्रकार से चेन्नई में कोरोना के मामले बढ़ते जा रहे हैं, ऐसे में खुद को सुरक्षित रखना बहुत जरूरी है। मेरे साथ मेरा परिवार भी है उन सब की जिम्मेदारी मेरे ऊपर है। मैं इन सब की जान खतरे में नहीं डाल सकता इसीलिए मैंने या दुकान लगाना बंद कर दिया।
आमदनी नहीं होने पर घर का खर्च कैसे चल रहा है यह पूछे जाने पर संतोष ने बताया कि वह फिलहाल अपने दोस्तों रिश्तेदारों और घरवालों से पैसे मंगा कर किसी तरह से गुजारा कर रहा है और उस दिन का इंतजार कर रहा है जब स्थिति सामान्य हो जाए।
उसका कहना है कि सरकार को हम जैसे लोगों पर भी ध्यान देना चाहिए। हम अपने प्रदेश से आकर के दूसरे प्रदेश कमाने के लिए आये है। इस महामारी की स्थति में न तो हमारे प्रदेश की सरकार ने हमारी सुध ली और न ही तमिलनाडु की सरकार ने।

