कोरोना से पहले कही भूख न निगल जाए

रीतेश रंजन, आईआईएन/चेन्नई, @Royret

कोरोना वायरस जो चीन से शुरू हुआ उसने दुनियाभर में हाहाकार मचा रखा है। दुनियाभर की सरकार इस महामारी से निपटने के लिए विभिन्न प्रकार के तरीके का इस्तेमाल कर रही है। भारत में भी इस महामारी से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवाहन पर 21 दिनों का लॉक डाउन रखा गया है।

इस लॉक डाउन के अनुसार कोई भी व्यक्ति अपने घर से बहार नहीं लग सकता। सभी को अपने घर में रहने की सलाह दी गयी है। यह सब इसलिए किया गया है ताकि इस महामारी पर नियंत्रण पाया जा सके। लॉक डाउन के कारन जो जहा पर वही रहेंगे वहां से कही बहार नहीं जा पाएंगे।

देश भर में लॉक डाउन लागु होने के बाद से देश के विभिन्न हिस्सों में विभिन्न राज्य से काम करने आये दिहाड़ी मजदुर भी जहा थे वही फस गए। इस लॉक डाउन की वजह से उनका काम भी बंद पड़ गया और उनके सामने भिखमारी की समस्या पैदा हो गयी है। चेन्नई के पेरंबूर इलाके में भी मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल से काम करने आये करीब 30 मजदुर भी इस लॉक डाउन का शिकार हो गए।

 

लॉक डाउन के बाद दो चार दिनों तक इनके पास जो पैसे थे उससे काम चला लेकिन उसके बाद इनके पैसे भी खतम हो गए। इन लोगों ने अपने मालिक से कुछ इंतज़ाम करने को कहा तो उन्होंने राज्य सर्कार का हेल्पलाइन नंबर देकर अपना पल्ला झाड़ लिया।

हेल्प लाइन नंबर से भी इन लोगों को कोई सुविधा नहीं मिली और वो भूखे मरने को विवश है। अब तो इन्हे लॉक डाउन ख़तम होने का इंतज़ार है आश बस यही है की इससे पहले उनके सांसे साथ न छोड़ दे।

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