गति के मंत्र पर रेलवे की स्वर्णिम चतुर्भुज तैयारी

भारतीय रेलवे देश के चारों कोनों को जोडऩे वाला पटरियों का चतुभुर्ज बनाकर 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेन दौड़ाने की योजना बना रहा है।

आईआईएन/चेन्नई, @Infodeaofficial

भारतीय रेलवे अपने नए अवतार में गति को मंत्र बना चुका है और हाल ही देश की पहली सेमी हाईस्पीड ट्रेन—18 पटरियों पर दौड़ाकर अपनी क्षमता और सामर्थ्य का प्रदर्शन कर चुका है। अब भारतीय रेलवे यात्रियों को तेज गति से देश के चारों कोने तक पहुंचाने पहुंचाने की योजना पर विचार कर रहा है। इस योजना के फलीभूत होते ही देश की चौहद्दी की परिक्रमा करने में लगने वाला पहले की अपेक्षा लगभग आधा हो जाएगा। 

दरअसल, अटल बिहारी बाजपेयी की भाजपा नीत एनडीए सरकार ने स्वर्णिम चतुर्भुज बनाकर देश के चारों महानगरों दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और मद्रास को छह लेन के सुपर हाइवे से जोड़कर जिस यातायात क्रांति की शुरुआत की थी, भारतीय रेलवे उसी तर्ज पर देश के चारों कोनों को जोडऩे वाला पटरियों का चतुभुर्ज बनाकर 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेन दौड़ाने की योजना बना रहा है। 

दक्षिण रेलवे के महाप्रबंधक आरके कुलश्रेष्ठ का कहना है कि इस योजना का प्रस्ताव बना है। प्रस्ताव के अंतर्गत दिल्ली से मद्रास, मद्रास से मुम्बई एवं मद्रास से हावड़ा के बीच नया रेल कॉरिडोर बनाया जाना है। तेज रफ्तार की रेलगाड़ियां चलाने के लिए बनाए जाने वाले इस कोरिडोर के निर्माण की जिम्मेदारी दक्षिण रेलवे के पास है।

दरअसल, वर्तमान सरकार रेलवे को विश्वस्तरीय सुविधाओं के साथ तेज गति वाला यातायात व परिवहन साधन बनाने में जुटी है। इसी के तहत देश में अहमदाबाद से मुंबई तक देश की पहली बुलेट ट्रेन चलाने की परियोजना 2016 में शुरू की गयी।

इसके बाद दिल्ली से काशी तक सेमी हाईस्पीड ट्रेन—18 कुछ ही दिनों में दौड़ने लगेगी। इसके अतिरिक्त देश के अन्य रूटों पर ट्रेन—18 चलाने की योजना पर रेलवे कार्यरत है। 

कुलश्रेष्ठ ने बताया कि 160 किलोमीटर प्रति घंटे की गति वाले कोरिडोर का प्रस्ताव, अनुमानित लागत और व्यवहार्यता परीक्षण का अनुरोध रेलवे बोर्ड के पास भेजा है। नई दिल्ली से मद्रास के बीच के कॉरिडोर निर्माण पर लगभग 34 हजार करोड़ रुपए तथा मद्रास से हावड़ा कॉरिडोर पर 25 हजार करोड़ रुपए लागत का अनुमान है। इसके अलावा मध्य रेलवे के अंतर्गत आने वाले मुम्बई से मद्रास के बीच के कॉरिड़ोर पर 26 हजार करोड़ रुपए की लागत आने का अनुमान है। 

रेलवे की यह महात्वाकांक्षी परियोजना रेलयात्रा की तस्वीर बदल देगी। अभी दिल्ली से मद्रास के बीच की 2200 किमी की दूरी तय करने में सुपरफास्ट ट्रेनों को भी औसतन लगभग 28 से 36 घंटे का समय लगता है, लेकिन इस परियोजना के पूरा होने पर यात्रा समय घटकर मात्र 14-15 घंटे ही रह जाएगा। मद्रास से हावड़ा के बीच की 26-27 घंटे की 1700 किलोमीटर की दूरी मात्र 13-14 घंटे में ही पूरी हो जाएगी। परियोजना के पूरा होने पर पर्यटक आज की तुलना में कई गुना कम समय में देश के चारों कोनों पर स्थित पर्यटन केंद्रों का भ्रमण कर सकेंगे। 

ऐसा नहीं है कि इस परियोजना को चालू करना बहुत आसान है। लेकिन कुलश्रेष्ठ कहते हैं कि भारतीय रेलवे की अभियांत्रिकी क्षमता और कार्य सामथ्र्य विश्व के उन रेलवे के बराबर हैं, जो बेहतरीन मानी जाती हैं। इस परियोजना के लिए दक्षिण रेलवे को चेन्नई से हावड़ा और नई दिल्ली से चेन्नई के बीच चेन्नई से गुडूर तथा मुम्बई से चेन्नई के बीच चेन्नई से रेनीगुंटा के ट्रैक को इस तेज रफ्तार के अनुकूल बनाना होगा और यह काम इतना मुश्किल नहीं है।

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