पहली किरण से होता है भगवान का अभिषेक: सूर्य मंदिर

श्रुति सिंघल, आईआईएन/ग्वालियर, @Infodeaofficial

जीडी बिड़ला ने बनवाया था ग्वालियर में सूर्य मंदिरग्वालियर भारत के मध्य प्रदेश प्रान्त का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। यह शहर गुर्जर प्रतिहार, तोमर तथा कछवाहाराजवंशों की राजधानी रहा है। इस शहर में इनके द्वारा छोड़े गए प्राचीन चिन्ह स्मारक, किला, महलों के रूप में मिल जाएंगे। ग्वालियर मेंस्थित सूर्य मंदिर कोणार्क(उड़ीसा) के प्रसिद्ध सूर्य मंदिर कीप्रतिकृति है। यह सूर्य देवता को समर्पित ग्वालियर में एक प्रसिद्ध तीर्थ
स्थान है। यह मुरार क्षेत्र में स्थित है। शहर में नवनिर्मित मंदिरों मेंसे एक है हैं कि सूर्य की पहली किरण मंदिमें स्थित भगवान की प्रतिमा परपड़ती है।    

इसका निर्माण प्रसिद्ध उद्योगपति जीडी बिड़ला ने सन् 1988 मेंबनवाया था। मंदिर के बाहरी दीवारों को लाल बलुआ पत्थर से बनाया गया है,जबकि अंदरूनी हिस्सा सफेद संगमरमर से निर्मित है। मंदिर की बाहरी दीवारों
पर हिंदू देवी-देवताओं के चित्र पत्थरों पर अंकित है।  ग्वालियर में कोणार्क जैसा सूर्यमंदिर, पहली से आखिरी किरण तक प्रतिमा पर रोशनी कोणार्क के प्राचीन सूर्यमंदिर से मिलता जुलता मंदिर ग्वालियर में भी है।इस मंदिर की खासियत है कि यहां सूर्य की पहली किरण से अंतिम किरण तक मंदिर में प्रतिष्ठित प्रतिमा तक पहुंचती है।

उद्योगपति घनश्यामदास बिड़ला के बनाए इस मंदिर में हालांकि साल भर सैलानीऔर श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है। लेकिन मकर संक्राति पर यहां पूजा का का विशेष महत्व माना जाता है। सूर्यमंदिर का नाम सुनते ही कोणार्क का
प्राचीन सूर्यमंदिर का दृश्य ही सामने उभर आता है। 

सूर्य देव एकमात्र एक ऐसे देवता हैं जिनके साक्षात दर्शन कर भक्त उन तकअपनी फरियाद पहुंचाते हैं।  वह अपने प्रभाव से समपूर्ण जगत को संचालितकरते हैं, साथ ही भक्तों के जीवन में खुशियों का उजियारा भी फैलाते हैं। 
भक्तों के जीवन को रौशन करने वाले भगवान सूर्य का एक ऐसा ही चमत्कारी धाम बसा है ग्वालियर में, जो दुनियाभर में सूर्य मंदिर के नाम से जाना जाता है।  कहा जाता है कि मंदिर का निर्माण बसंत बिड़ला ने 1988 में करवाया था.यह मंदिर वास्तुकला का एक अद्भुत नमुना है। 

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