तमिलनाडु में छात्रों का विरोध दूसरे दिन भी जारी रहा

आईआईएन/मुम्बई, @Infodeaofficial
देशभर में नागरिकता अधिनियम और जामिया मीलिया में विद्यार्थियों पर हुए पुलिस के बर्बर रवैये के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन तमिलनाडु में दूसरे दिन भी जारी रहा। गौरतलब है कि सोमवार को आईआईटी, मद्रास विश्वविद्यालय, पुदुचेरी विश्वविद्यालय समेत कई शिक्षण संस्थानों में नागरिकता अधिनियम और जामिया मीलिया में विद्यार्थियों पर हुए पुलिस के बर्बर रवैये के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ जो मंगलवार को भी जारी रहा।
मंगलवार को इस विरोध प्रदर्शन में अन्य कई अन्य शिक्षण संस्थान भी शामिल हुए। मद्रास विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों ने दूसरे दिन भी विरोध जारी रखा। ये छात्र विश्वविद्यालय परिसर के बाहर और अंदर तख्ते, बोर्ड और बैनर लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। कुछ विद्यार्थी जो विश्वविद्यालय गेट के आगे प्रदर्शन कर रहे थे, उन्हें पुलिस ने बल पूर्वक वहां से हटाया।
मंगलवार को डा. अम्बेदकर लॉ युनिवर्सिटि के विद्यार्थियों ने संस्थान के परिसर में विरोध प्रदर्शन मेें और नारेबाजी की। इन छात्रों का कहना है कि दिल्ली पुलिस ने जामिया में जिस प्रकार से वहां के विद्यार्थियों के साथ बर्बर व्यवहार किया है हम उसकी नींदा करतेे हैं। क्या अब हम छात्रों को विरोध करने का भी अधिकार नहीं रह गया है। केंद्र सरकार क्या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को खत्म कर देना चाहती है। शांतिपूर्ण प्रदर्शन की सीख हमे हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से मिली है।
इस दौरान राज्य की प्रमुख विपक्षी पार्टी डीएमके ने भी राज्यभर में नागरिकता अधिनियम को लेकर विरोधा प्रदर्शन किया।
डीएमके प्रमुख स्टालिन ने कांचिपुरम में एक विशाल जनसमूह के साथ इस विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया।
वहीं डीएमके से लोकसभा सांसद कनीमोझी और पूर्व केंद्रिय मंत्री दयानिधि मारण ने चेन्नई में डीएमके के प्रदर्शन की कमान सम्भाली।
इस मौके पर दयानिधिमारण ने कहा केंद्र की भाजपा सरकार को हिंदी बोलने वाले हिंदु चाहिए। इसका मतलब यही है कि श्रीलंकन तमिल जो हमारे ही भाई हैं उनके प्रति भाजपा सरकार को कोई भी संवेदना नहींं है। भाजपा केवल हिंदी बोलने वाले हिंदुओं के साथ है और मुसलमानों का बहिस्कार कर रही है। जो सही नहीं है और हमारे संविधान के खिलाफ है।

