मानसिक रूप से विकलांग लोगों के लिए लॉक डाउन बड़ी विपदा

सुष्मिता कुमारी, आईआईएन/चेन्नई, @SushmitaSamyak

लॉकडाउन के बाद से ऐसा कोई वर्ग नहीं जिसे परेशानी का सामना न करना पड़ा हो। गरीब हो या अमीर कोरोना महामारी ने सभी तो सताया है। लेकिन इस लॉक डाउन का ज्यादा शिकार कमजोर वर्ग के लोग हो रहे है जिनके पास आमदनी का कोई जरिया नहीं रहा।

इससे भी बुरी स्थिति सड़क पर भीक मांग कर गुजरा करने वाले लोगों की व मानसिक रूप से विकलांग लोगों की है जिनका जीवन लोगों की दया पर गुजरता था।

ऐसे ही लोगों के लिए चेन्नई में अन्बगम रिहैबिलिटेशन सेंटर चलाया जा रहा है। यह संस्था लॉक डाउन के बाद से काफी समस्याओं से जूझ रहा है। इस संस्था की शुरुआत रफीक ने की थी जिसके बाद इस संस्था से कई लोग जुड़ते रहे।

इस संस्था का उद्देश्य है कि मानसिक रूप से कमजोर लोगों को शरण दे उनका बेहतर रूप से ख्याल रखा जाया। यहां ऐसे लोगों को खाने-पीने के साथ दवा व अन्य सुविधाएं भी दी जाती है।

इस संस्था की तीन शाखाएं हैं और हर शाखा में 300 से 400 लोग रहते हैं। इन लोगों के खाने-पीने, रहने, दवा आदि की व्यवस्था संस्था की ओर से की जाती है। पहले इस काम का बीड़ा रफीक ने खुद उठाया था और बाद में उनकी मदद के लिए कई लोग आने लगे।

रफीक बताते है की लॉकडाउन के बाद समस्या काफी बढ़ गई है। वह बताते हैं कि पहले की तरह अब मदद उन तक नहीं पहुंच पा रही है।

हालांकि अभी भी कई ऐसे लोग हैं जो ऑनलाइन पेमेंट के माध्यम से उन तक पैसा पहुंचा रहे हैं।

लेकिन इससे उनकी जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही। जरुरत की समान लाने में भी काफी कठिनाई हो रही है।

संजीव जैन बताते हैं कि हमारे अनाथालय में करीब 300 से 400 लोग रहते हैं। अचानक हुए लॉकडाउन की घोषणा से हमें इतना मौका नहीं मिला कि हम इनके लिए राशन आदि इकठ्ठा कर पाएं।

हम सरकार पर भी इसकी जिम्मेदारी नहीं थोप रहे और ना ही इसके लिए उन पर दोषारोपण कर रहे हैं। सरकार अपने हिसाब से काम कर रही है लेकिन मैं समझता हूं कि ऐसे समय में लोगों को आगे बढ़कर इन अनाथ बच्चों की मदद करनी चाहिए।

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