कही ख़ुशी तो कही गम

रीतेश रंजन, आईआईएन/चेन्नई, @Royret

भारत में कोरोना महामारी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 मार्च से देशभर में लॉक डाउन की घोषणा की थी। इस लॉकडाउन की घोषणा प्रधानमंत्री ने 23 मार्च को की और राष्ट्र के नाम अपने इस सन्देश में उन्होंने कहा कि इस लॉकडाउन में सभी लोग अपने घर पर रहें और बिना किसी जरुरी काम के घर से बाहर न निकलें।

प्रधान मंत्री के इस घोषणा से काफी लोगों को लाभ हुआ तो कुछ ऐसे भी है जिन्हें लॉकडाउन का दंश झेलना पड़ रहा है। कईयों की नौकरी जा रही तो कईयों की वेतन में कटौती कर दी गयी है। कई जगह फैक्ट्री बंद पड़ने से वहाँ काम करने वाले मजदूरों को काफी कठिन स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।

अपने इस सम्बोधन में उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर लोग, दिहाड़ी मजदूर, फैक्ट्री और कंपनी में काम करने वाले लोगों को छुट्टी देने की सलाह दी और यह छुट्टी वैतनिक रखने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री के इस अनुरोध का कई लोगों पर सकारात्मक असर पड़ा।

इस अनुरोध के बाद कई छोटे-बड़े व्यवसाइयों ने अपने यहाँ काम करने वाले लोगों को वैतनिक अवकास दे दिया। वहीं इसके अलावा कई घरों में काम करने वाले घरेलू नौकरों को भी लॉक डाउन खत्म होने तक वैतनिक अवकाश दे दिया गया ।

सरकार ने लोगों से यह भी आग्रह किया कि अपने घर में रहने वाले किरायेदार जो लॉक डाउन के कारण किराया देने में असमर्थ हों उनसे किराया मौजूदा समया में न लिया जाए। तमिलनाडु सरकार ने तो इस सम्बन्ध में एक आदेश भी जारी किया कि अगर किसी मकान मालिक को ऐसा करते पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कारवाई की जाएगी।

वही आईटी कंपनी ने अपने कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की सुविधा दी। यही नहीं इसके अलावा उन्हें अतिरिक्त वेतन का भी भुगतान किया गया। लेकिन इसके अलावा कई ऐसे लोग भी है जिन्हे इस लॉक डाउन का खामियाजा भी भुगतना पड़ा है।

सर्विस बेस्ड की आईटी कंपनियों ने जहाँ अपने कर्मचारियों को अतिरिक्त भुगतान किया वहीं प्रोडक्ट बेस्ड आईटी कंपनी ने अपने कर्मचारियों के वेतन में कटौती की तो कईयों को लॉकडाउन तक घर बैठने को कहा गया है।

इसके अलावा मीडिया में भी काम करने वाले लोगों के हालात काफी बेहतर नहीं है। सूत्रों से मिले जानकारी के मुताबिक कुछ मीडिया संस्थानों ने अपने कर्मचारियों के वेतन में कटौती की है तो किसी ने पब्लिकेशन पर ही रोक लगा दी है।

यह हाल केवल प्रिंट मीडिया में नहीं बल्कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में भी है। कई मीडिया संस्थान घड़ियाली आंसू बहकर इस मौके का फायदा उठाने में लगे हुए है। अपने कर्मचारियों का वेतन काट इस मौके की दुहाई देकर इसका फायदा उठाने में लगे हुए है।

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