आईआईटी मद्रास का नया अध्ययन: Active Flow Control से घट सकती है कारों की ड्रैग, बढ़ सकती है माइलेज

घूमते सिलिंडर की मदद से वायुगतिकी सुधारने और ईंधन बचाने की नई दिशा, ऑटोमोबाइल डिजाइन में बड़ा बदलाव संभव
    Ritesh Rajan,INN/Chennai,@royret
आईआईटी मद्रास के शोधकर्ताओं ने वाहन तकनीक के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। शोधकर्ता आकाश एझिलअरसन के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन में यह दिखाया गया है कि कार के आसपास बहने वाली हवा को नियंत्रित कर उसकी ड्रैग यानी प्रतिरोध शक्ति को कम किया जा सकता है। इससे वाहन की वायुगतिकी बेहतर होती है और ईंधन की बचत की संभावना बढ़ती है।
यह शोध पत्रिका Physics of Fluids में प्रकाशित हुआ है और इसे AIP Science ने भी प्रमुखता से प्रस्तुत किया हैl अध्ययन का मुख्य विचार यह है कि जब कार चलती है, तो उसकी सतह के पास की हवा घर्षण के कारण धीमी हो जाती है। यह धीमी हवा कार की आकृति के साथ आसानी से आगे नहीं बढ़ पाती, जिससे पीछे एक अशांत क्षेत्र या वेक बनता है। यही स्थिति ड्रैग बढ़ाती है। ड्रैग बढ़ने से इंजन पर अधिक दबाव पड़ता है और पेट्रोल-डीजल की खपत भी बढ़ जाती है।
आज के समय में, जब ईंधन की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और ऊर्जा दक्षता को लेकर दुनियाभर में चिंता है, ऐसे में यह अध्ययन और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। वाहन यदि कम प्रतिरोध का सामना करेंगे, तो वे कम ईंधन में अधिक दूरी तय कर सकेंगे। इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए भी यह तकनीक उपयोगी हो सकती है, क्योंकि इससे बैटरी की रेंज बढ़ने की संभावना है।
कैसे काम करती है यह तकनीक
शोधकर्ताओं ने एक सरल कार मॉडल के पीछे एक घूमता हुआ सिलिंडर लगाया और उसका सिमुलेशन किया। इस सिलिंडर का काम धीमी होती हवा में ऊर्जा जोड़ना था, ताकि हवा कार की सतह के साथ अधिक समय तक बनी रहे और जल्दी अलग न हो। जब हवा सतह से अलग नहीं होती, तो ड्रैग कम होता है और वाहन की एयरोडायनामिक क्षमता बेहतर बनती है।
टीम ने अलग-अलग आकार के सिलिंडरों का परीक्षण किया। परिणामों से पता चला कि बड़े सिलिंडर ड्रैग को अधिक कम करते हैं, लेकिन उन्हें चलाने के लिए ज्यादा ऊर्जा भी चाहिए। इसलिए सबसे अच्छा विकल्प हमेशा सबसे बड़ा सिलिंडर नहीं होता। असल समाधान वह है, जिसमें ड्रैग कम करने और ऊर्जा खर्च करने के बीच सही संतुलन हो।
आकाश एझिलअरसन के अनुसार, शोध का उद्देश्य सिर्फ ड्रैग को अधिकतम रूप से कम करना नहीं, बल्कि कुल प्रदर्शन के लिहाज से सबसे प्रभावी संतुलन ढूंढना है। यही इस अध्ययन की सबसे बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि मानी जा रही है।
ईंधन बचत के लिए अहम शोध
यह अध्ययन ऐसे समय में आया है जब ऑटोमोबाइल उद्योग अधिक माइलेज, कम उत्सर्जन और बेहतर ऊर्जा दक्षता की दिशा में काम कर रहा है। यदि वाहनों की वायुगतिकी बेहतर हो जाए, तो सामान्य कारों में पेट्रोल की खपत कम की जा सकती है। साथ ही, यह तकनीक भविष्य के वाहन डिजाइन में भी उपयोगी साबित हो सकती है।
आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर प्रसाद पटनायक ने कहा कि मौजूदा ऊर्जा संकट के दौर में पेट्रोल की हर बूंद बचाने की जरूरत है। उनके अनुसार, यह शोध वाहन डिजाइनरों को केवल बाहरी आकार पर निर्भर रहने के बजाय सक्रिय प्रवाह नियंत्रण जैसी तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित कर सकता है।
आगे की संभावनाएं
हालांकि यह अध्ययन एक सरल मॉडल पर आधारित है, लेकिन इसका सिद्धांत व्यापक है। यही विचार अन्य प्रवाह-नियंत्रण तकनीकों पर भी लागू किया जा सकता है। इसमें पाईजोसेरामिक एक्चुएटर पैच और अन्य सक्रिय नियंत्रण उपाय शामिल हो सकते हैं।
प्रोफेसर पटनायक की टीम अब इन वैकल्पिक उपायों पर भी काम कर रही है। वे युवा शोधार्थियों को भी इस क्षेत्र से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। उनका मानना है कि भविष्य की गाड़ियां केवल बड़े इंजन या बैटरी से नहीं, बल्कि स्मार्ट हवा-प्रबंधन तकनीकों से भी अधिक कुशल बनेंगी।
यह शोध वाहन अभियांत्रिकी के लिए एक नया रास्ता खोलता है, जो भविष्य में साफ, किफायती और अधिक ऊर्जा-सक्षम परिवहन की दिशा में अहम भूमिका निभा सकता है।

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