लॉक डाउन के बाद से निरंतर सेवा में जुटे मृणाल शेखर

सुष्मिता कुमारी, आईआईएन/चेन्नई, @SushmitaSamyak

देश में अभी एक ऐसा दौर चल रहा है जब एक बेटा अपने ही पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने से कतरा रहा है| मध्य प्रदेश के प्रेम सिंह मेवाड़ा की मृत्यु कोरोना संक्रमण के कारण हुई| जिसके बाद मृतक की पत्नी और इकलौते बेटे ने उनकी अंतिम यात्रा में शामिल होने से मना कर दिया|

वहीं हमारे देश में ऐसी भी योद्धा हैं जो अपने परिवार की चिंता छोड़कर दिन-रात जन-कल्याण में लगे हुए हैं| जी हाँ, हम बात कर रहें एक ऐसी शख्सियत की जो अपनी और अपने परिवार की परवाह किये बगैर लोगों की सेवा में तत्पर हैं|

अमरपुर के भाजपा नेता, डॉ. मृणाल शेखर लॉकडाउन के पहले दिन से अमरपुर और शम्भूगंज इलाके में जनता रसोई चला रहे हैं| जिसके माध्यम से रोजाना सैकड़ों जरुरतमंदों को खाना मिल रहा है| ये अपनी रसोई में समाजिक दूरी कर के पालन कर विशेष ख्याल रखते हैं|

डॉ. शेखर को कुछ कारणवश अपनी रसोई थोड़े समय के लिए बंद करनी पड़ी थी जिसका उन्हें काफी अफ़सोस है| क्यूंकि उस दौरान भोजन के इंतज़ार में कई लोग उनके रसोई केंद्र तक पहुँच जा रहे थे |

डॉ. शेखर भोजन के साथ-साथ लोगों में सूखा राशन, बिस्कुट, मास्क, साबुन व अन्य जरुरी सामानों का भी वितरण कर रहे हैं| वे कहते हैं कि मौजूदा परिस्थितियों में मास्क की आवश्यकता रोटी, कपड़ा और मकान की तरह है| ऐसी में उनका ये कर्तव्य है कि हर एक व्यक्ति के पास मास्क उपलब्ध हो |

डॉ. शेखर अपने क्षेत्र में राशन दुकान, गैस एजेंसी जैसी जगहों पर खुद जाकर निरिक्षण करते हैं और ये सुनिश्चित करते हैं कि लोगों को इस मुश्किल घड़ी में किसी भी प्रकार की परेशानियों का सामना न करना पड़े |

डॉ. शेखर कहते हैं कि ये बिल्कुल सच कहा गया है कि हर पुरुष के कामयाबी के पीछे एक महिला का हाथ होता है| मैं खुद को बहुत कामयाब तो नहीं मानता पर कुछ जरुरतमंदों की सेवा कर के दिल को तसल्ली मिलती है| और इसमें मुझे मेरी धर्म पत्नी डॉ. प्रीति शेखर का पूरा-पूरा सहयोग मिलता है|

मैं खुद ये महसूस करता हूँ कि मैं अपनी बीवी और बच्चों पर प्रयाप्त समय नहीं दे पाता हूँ| पर इस बात की शिकायत मेरी धर्म पत्नी ने मुझसे कभी नहीं की| और मुझे जनता की सेवा करने के लिए हमेशा प्रेरित करती रही |

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