अपनी मिटटी में ही दम तोड़ेंगे: राजस्थान प्रवासी

रीतेश रंजन, आईआईएन/चेन्नई, @Royret
चेन्नई में राजस्थान मूल के प्रवासी अब तमिलनाडु सरकार से अनुमति लेकर अपने पुरे परिवार के साथ पैतृक गावं लौटने के खुद का वहां कर चेन्नई से रावण हो रहे है। शनिवार को चौथा दिन था जब यहाँ से राजस्थान के परिवारों को राजस्थान रवाना क्या गया।
रोजाना साहुकारपेट के इलाके से रोजाना 100 से ज्यादा छोटी बड़ी बसों को यहाँ से रवाना किया जाता है। इसके अलावा 200 -300 निजी वाहन भी यहाँ राजस्थान के लिए रवाना हो रहे है।
ये लोग मुख्या रूप से राजस्थान के जालोर, सिरोही, पाली, जोधपुर, झालाना आदि जगह पर जाने वाले लोगों की तादाद ज्यादा है।
इनफोडिया सवाददाता ने जब इनलोगों से बात करने की कोशिश की तो इनलोगों का कहना है की यह महामारी कब किसको निगल जाए इसका कोई ठिकाना नहीं।
कबतक हम अपने को और अपने परिवार वालों को घरों में बंद कर रखेंगे। ऐसी स्थिति में उधोग धंधे भी बंद है घर बैठे तो कोई हमे भोजन नहीं देगा।
इसके अलावा हमारे ऊपर माकन का किराया व अन्य खर्च है जिसका भुगतान भी हमे ही करना है। लेकिन यह लॉक डाउन कब तक चलेगा इसके बारे में किसी को कुछ भी पता नहीं है।
वही दूसरी ओर न तो इस बीमारी का कोई इलाज़ और न ही वैक्सीन निकली है जिससे हम खुद को दिलासा दे सके की कोरोना का हमपर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ेगा।
अब ऐसी परिस्थिति में हमारा पास अपने गावं जाने के अलावा कोई चारा नहीं है। अपने गावं में हमे किराया देने का झंझट नहो होगा। वह हमारे खेतों से अनाज आता है वह हमारे परिवार के लिए काफी होगा और सबसे बड़ी बात अगर वहा भी मै कोरोना महामारी का शिकार बन जाता हूं तो मुझे कन्धा देने के लिए मेरे अपने रिश्तेदार साथ होंगे। मै अपनी मिटटी पर दम तोडूंगा और मेरे परिवार की देखभाल के लिए वह लोग रहेंगे ।
राजस्थान मूल के काफी लोग तमिलनाडु में व्यवसाय व रोजगार करने के लिए काफी साल पहले तमिलनाडु आए थे। इन लोगों ने राजस्थान से आकर के तमिलनाडु के विभिन्न जिलों में व्यवसाय जमाया और खुद को अपने परिवार और सगे संबंधियों को यहां बसने और काम धंधा जमाने में मदद की।
तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में यहां काफी साल पहले राजस्थान से मारवाड़ी लोग आए। इन्होंने सेंट्रल स्टेशन के पास पहले बसना शुरू किया। तमिल वाले इन लोगों को साहूकार कहते थे, इसलिए इस जगह का नाम साहूकार पेट पर गया।
इन लोगों ने यहां पर काफी अच्छा धंधा और व्यवसाय जमा लिया है। गौरतलब है कि साहूकार पेट जैसे तंग इलाके से हर प्रकार के सामान का थोक में बिक्री होती है और ईन सामान तमिलनाडु के हर जिले और बाहर के प्रदेश में भेजा जाता है।
प्रवासियों को राजस्थान भेजने की व्यवस्था कराने वाले पवन सिंह राजपुरोहित का कहना है कि तमिलनाडु सरकार इन लोगों को वापस जाने के लिए ईपास मुहैया करा रही है। यह पास उन लोगों को मुहैया कराया जा रहा है जो कि स्वयं अपना वाहन कर वापस अपने प्रदेश जा सकने में सक्षम है। ऐसे में राजस्थान सरकार का एक फैसला आया है कि हम इन प्रवासी लोगों को सीमा लांघने नहीं देंगे यह अति निंदनीय और दुखदाई है।
जब केंद्र सरकार लोगों को वापस अपने घरों में भेजने के लिए प्रयास कर रही है तो राजस्थान सरकार ऐसे में इन लोगों को रोकने का काम क्यों कर रही है। उनके पास बेहतर संसाधन हैं जिससे कि इन लोगों को सीमा से अंदर घुसने से पहले ही स्वास्थ जांच कराकर तब इन्हें इनके गांव भेजा जाए यह व्यवस्था सरकार की जिम्मेदारी होती है लेकिन सरकार इस जिम्मेदारी को लेने से पीछे हट रही है।

