देशद्रोह के मामले में वाइको को बड़ी राहत

एक साल की सजा पर मद्रास हाईकोर्ट ने लगाई रोक

आईआईएन/चेन्नई, @Infodeaofficial 

विशेष कोर्ट द्वारा एमडीएमके महासचिव वाइको को देशद्रोह के मामले में एक साल की सजा और10 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाए जाने के बाद वाइको ने हाल ही मद्रास हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर स्पेशल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी। गुरुवार को हुई इस पर सुनवाई करते हुए मद्रास हाईकोर्ट ने उनकी सजा पर रोक लगा दी।

याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायाधीश पी.डी. आदिकेशवलु ने वाइको को राहत दी। कोर्ट ने सरकारी वकील एन. नटराजन द्वारा राज्य की संप्रभुता के खिलाफ टिप्पणी करने से वाइको को रोकने वाली मांग को स्वीकार नहीं किया। साथ ही वाइको के वकील जी. देवदास से उनको ऐसी टिप्पणी से बचने की सलाह देने का निर्देश दिया।

उल्लेखनीय है कि दस साल पुराने देशद्रोह के एक मामले में गत ५ जुलाई को एमपी-एमएलए से जुड़े मामलों की विशेष कोर्ट ने वाइको को एक साल के कारावास और दस हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई थी। वाइको ने इस निर्णय पर अपील की बात कहते हुए जमानत की याचिका लगाई थी। जिसके बाद उन्हें जमानत भी मिल गई थी।

जज जे. शांति ने याचिका को स्वीकार करते हुए सजा को एक महीने के लिए रोक दिया था। उसके बाद वाइको ने मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दायर कर स्पेशल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। दायर याचिका में वाइको ने कहा था कि उन्हें दोषी ठहराने के लिए विशेष कोर्ट का फैसला किसी भी साक्ष्य या अदालत के समक्ष प्रस्तुत की गई सामग्री पर बल्कि विशेष न्यायाधीश के व्यक्तिगत दृष्टिकोण पर आधारित है।

उन्होंने कहा कि बोले गए शब्दों के प्रभाव को निष्पक्ष रूप, उचित मानकों और मजबूत दिमाग से आंका जाना चाहिए। उन लोगों की तरह नहीं जो प्रत्येक दृष्टिकोण में शत्रुतापूर्ण खतरा पैदा करने की कोशिश करते हंै अन्यथा भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार खतरे में पड़ जाएगा और स्वतंत्रता केवल कागजों में ही रह जाएगी।

यह था मामला
वाइको पर दर्ज यह मामला 2009 का है। एक पुस्तक विमोचन समारोह में उन्होंने ईलम में क्या घट रहा है उस पर भाषण दिया था। इस दौरान उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर भारत देश को अखण्ड और संप्रभु रहना है तो श्रीलंका में लिट्टे के खिलाफ युद्ध को रोका जाए। चेन्नई की थाउजेंड लाइट पुलिस ने वाइको के इस भाषण की रिकॉर्डिंग सुनकर आइपीसी की धाराओं 124 ए और 153 ए के तहत मुकदमा दर्ज किया था। विशेष कोर्ट की जज ने उनको आइपीसी की धारा 124ए के तहत दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।

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