चेक बाउंस मामले में कांग्रेस के पूर्व सांसद की सजा बरकरार

आईआईएन/नई दिल्ली, @Infodeaofficial
मद्रास उच्च न्यायालय ने कांग्रेस के एक पूर्व सांसद की चेक बाउंस मामले में जेल की सजा को बरकरार रखा है। अदालत ने उनकी इस दलील को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने एक फाइनेंसर द्वारा कर्ज के तौर पर उन्हें दिए गए धन के स्रोत पर सवाल उठाया था।
न्यायमूर्ति पी एन प्रकाश ने कहा कि देह व्यापार करने वाली कोई महिला अगर कर्ज देती है तो क्या उसे इस आधार पर कर्ज वापस करने से इनकार किया जा सकता है कि उसने पैसा अनैतिक और अवैध तरीके से कमाया है। न्यायमूर्ति प्रकाश ने कहा, इस सवाल का जवाब है नहीं। कोई चोर किसी डकैत को वैध रूप से लूटने का हकदार नहीं है।
अदालत ने पूर्व सांसद और राजीव गांधी मेमोरियल एजुकेशनल ट्रस्ट के एक संस्थापक न्यासी अंबारसु को सजा देने के निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखने का आदेश दिया। फाइनेंसर (कर्जदाता) मुकुंदचंद बोथरा (दिवंगत) ने चेक बाउंस की अपनी शिकायत में कहा था कि अंबारसु ने 2002 में विभिन्न विकास कार्यों के लिए 35 लाख रुपए का कर्ज लिया था।
उन्होंने इस राशि का चेक उन्हें दिया था लेकिन यह चेक खाते में पर्याप्त रकम नहीं होने की वजह से बैंक से वापस आ गया। निचली अदालत ने अंबारसु, उसकी पत्नी कमला अंबारसु और न्यास के प्रबंध न्यासी पी मणि को इस बाबत दो साल की सजा सुनाई थी। उन्होंने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में पुनरीक्षण याचिका दायर की थी।
लेकिन इस दौरान अंबारसु की पत्नी कमला अंबारसु की मौत हो गई। अपनी याचिका में उन्होंने दावा किया था कि फाइसेंसर ने 35 लाख रुपए की राशि का खुलासा आयकर रिटर्न में नहीं किया है। इसलिए रकम लौटाने की जरूरत नहीं है।
उच्च न्यायालय ने याचिका को खारिज कर दिया है। इस मामले में अंबारसु का पक्ष पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता के वकिल बी. कुमार और डीएमके के वकिल एनआर इलंगो ने रखा तो मुकुंदचंद बोथरा की ओर से उनके बेटे गगन बोथरा ने मामले की पैरवी की।

