भारत की ‘लुक ईस्ट’ नीति अब ‘एक्ट ईस्ट’ नीति में परिवर्तित होकर पूर्वोत्तर क्षेत्र में जबरदस्त प्रगति लाई: जगदीप धनखड़
उपराष्ट्रपति ने कामले जिले में प्रथम संयुक्त मेगा न्योकुम युलो उत्सव में भाग लिया

आईएनएन/कामले, @Infodeaofficial
भारत के उपराष्ट्रपति, जगदीप धनखड़ ने आज कहा, “कई दशक पहले, भारत सरकार ने ‘लुक ईस्ट’ नीति की शुरुआत की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे ‘एक्ट ईस्ट’ में बदल दिया, क्योंकि केवल देखने से कुछ नहीं होगा; कार्रवाई करना आवश्यक है। जब कार्रवाई होती है, तो अद्भुत बदलाव देखने को मिलते हैं। हवाई यात्रा, हवाईअड्डे, रेलवे संपर्क, सड़क संपर्क और 4G नेटवर्क की उपलब्धता – ये सभी अरुणाचल प्रदेश में प्रगति के संकेत हैं।”
कामले जिले के काम्पोरिजो सर्कल में आयोजित प्रथम संयुक्त मेगा न्योकुम युलो उत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में सभा को संबोधित करते हुए, धनखड़ ने कहा, “अरुणाचल प्रदेश में 50,000 मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता है। एक मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए ₹10 करोड़ के निवेश की आवश्यकता होती है, जिसका अर्थ है कि अरुणाचल प्रदेश में ₹5 लाख करोड़ के निवेश की संभावना है। किरेन जी में जरूर कुछ जादू है। उन्होंने प्रधानमंत्री को इस बारे में समझाने में सफलता प्राप्त की और आप सभी से इस अवसर का लाभ उठाने, सहयोग करने एवं अपनी संस्कृति को संरक्षित करने का आग्रह किया। ऐसे अवसर पर यहां आना मेरे लिए बेहद आनंद का विषय है।”
उपराष्ट्रपति ने महत्वपूर्ण विकास पर प्रकाश डालते हुए कहा, “भारत के इतिहास में पहली बार बौद्ध समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया गया है, और एक बौद्ध नेता को केंद्रीय मंत्री पद भी सौंपा गया है। यह ऐतिहासिक निर्णय पूरी दुनिया को एक सशक्त संदेश देता है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि इस प्रगति से यह सिद्ध होता है कि भारत एक अनुपम राष्ट्र है और हमें राष्ट्रवाद से ओत-प्रोत रहना चाहिए। उन्होंने कहा “हम किसी भी स्थिति में राष्ट्रीय हित, राष्ट्र के प्रति समर्पण, और उसकी सेवा के संकल्प से समझौता नहीं कर सकते” ।
उपराष्ट्रपति ने भारत की सांस्कृतिक एकता पर जोर देते हुए कहा, “भारत जैसा कोई दूसरा देश नहीं है। आज आप न्योकुम युलो मना रहे हैं, वहीं पूरे देश में होली, बैसाखी, लोहड़ी, बिहू, पोंगल और नवान्न जैसे पर्व भी मनाए जाएंगे। भारत में हम जहां भी हों, हमारी सोच और परंपराएं एकजुट रहती हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि, “आज भारत एक सशक्त राष्ट्र है। अब कोई भी हम पर बुरी नजर नहीं डाल सकता। हमारे प्रधानमंत्री दुनिया के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं, और आप सभी सौभाग्यशाली हैं कि जिस व्यक्ति पर आपने विश्वास किया, उस पर प्रधानमंत्री ने भी विश्वास जताया है। 140 करोड़ की आबादी वाले देश में, जहां केंद्रीय मंत्रिमंडल में केवल दो दर्जन से अधिक मंत्री होते हैं, वहां किरेन जी का बार-बार शामिल होना यह दर्शाता है कि अरुणाचल प्रदेश निरंतर प्रगति कर रहा है, चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों।”
उपराष्ट्रपति ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के योगदान की सराहना करते हुए कहा, “किरेन रिजिजू जी केंद्र सरकार में वरिष्ठ और प्रभावशाली मंत्री हैं। उन्हें चार बार लोकसभा के लिए चुना गया है। इसलिए मैं कहता हूं, किरेन जी, आपने फ्रंटियर हाईवे का सपना देखा है। आपका यह सपना जरूर साकार होगा। मैं जानता हूं कि अरुणाचल प्रदेश के लिए आपने कितने सपने देखे हैं और कितने बड़े बदलाव लाए हैं।”
उपराष्ट्रपति ने अपनी पहली अरुणाचल यात्रा को याद करते हुए कहा, “जब मैं पहली बार अरुणाचल प्रदेश आया था, तब यह राज्य स्थापना दिवस समारोह था। मैंने आपकी जनजातियों को देखा और मंत्रमुग्ध हो गया। भारत की शान को देखा।”
इस अवसर पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री एवं अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू, 25-रागा के विधायक रोटोम तेबिन, न्यीशी एलीट सोसाइटी के अध्यक्ष ताना शोरन, तानी सुपुन दुकुन के अध्यक्ष एच. के. शल्ला, प्रथम संयुक्त मेगा न्योकुम युलो उत्सव समिति, बोसीमला के अध्यक्ष गुची संजय, केंद्रीय न्योकुम समिति के सहायक महासचिव रब कारा दानी एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे।

