पर्यवारण संरक्षण में प्लास्टिक एक बड़ी बाधा

INN/Shimla, @Infodeaofficial
शिमला के आरकेएमवी कॉलेज द्वारा पर्यावरण संरक्षण को लेकर अनूठी मुहिम चलाई जा रही है। कॉलेज की छात्राओं द्वारा शिमला के अलग अलग क्षेत्रों से प्लास्टिक इकट्ठा करके उसका उचित प्रबंधन किया जा रहा है और नगर निगम शिमला के साथ इसे लेकर एमओयू भी साइन किए गए हैं।
केंद्र सरकार ने साल 2022 से देश में सिंगल यूज प्लास्टिक को पूरी तरह से बैन किया है और राज्य सरकारों ने भी इसके क्रियान्वयन में प्रतिबद्धता जताई है। इसी मुहिम को सफल बनाने के लिए शिमला के राजकीय कन्या महाविद्यालय ने भी खास मुहिम चलाई है जिसके तहत यहां के शिक्षकों और छात्राओं ने प्लास्टिक को जमा कर इसके उचित प्रबंधन का जिम्मा उठाया है।
कन्या महाविद्यालय की छात्राएं शिमला के अलग अलग क्षेत्रों से प्लास्टिक जमा कर उसका उचित प्रबंधन करती हैं। प्लास्टिक से आकर्षक उत्पाद तैयार किए जाते हैं और उनकी प्रदर्शियां लगाई जाती है। प्लास्टिक को कॉलेज द्वारा शिमला नगर निगम को बेचा जाता है जिसे कॉलेज की कमाई भी हो जाती है। अब तक कॉलेज की तरफ से करीब 100 किलो से ज्यादा प्लास्टिक नगर निगम को बेचा जा चुका है। मुंबई की एक कंपनी के साथ भी प्लास्टिक के प्रबंधन को लेकर कॉलेज ने एमओयू साइन किया है।
प्लास्टिक के उचित प्रबंधन को लेकर कॉलेज के शिक्षक भी छात्राओं को प्रेरित कर रहे हैं। कॉलेज की प्राध्यापक के नेतृत्व में पूरे शिमला में इसे लेकर जागरुकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। आरकेएमवी कॉलेज द्वारा फरवरी 2024 से अलग अलग प्रोजेक्ट कॉलेज में प्लास्टिक प्रबंधन की दिशा में चलाए जा रहे हैं जिसके जरिए आसपास के लोगों को भी इसके बारे में जागरूक किया जा रहा है।
वहीं कॉलेज की कैंटीन से निकलने वाले ऑर्गेनिक कचरे का भी कॉलेज के अंदर ही उचित प्रबंधन किया जाता है और कंपोस्ट खाद तैयार करके कॉलेज में यहां एक पौधशाला भी तैयार की गई है। कॉलेज की ये मुहिम यहां छात्राओं के जरिए पूरे शिमला को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक कर रही है।
पर्यवारण संरक्षण में प्लास्टिक एक बड़ी बाधा हमेशा से रही है और इसके समाधान के लिए केंद्र सरकार भी लगातार प्रयासरत है। साल 2022 में इसे लेकर बड़ा फैसला भी केंद्र की तरफ से लिया गया था औऱ साथ ही पर्यावरण से प्लास्टिक को पूरी तरह हटाने के लिए राज्य सरकारों के सहयोग की भी प्रतिबद्धता जताई थी जिसके बाद शिमला का ये राजकीय विद्यालय भी पर्यावरण से प्लास्टिक को हटाने में बड़ी भूमिका निभा रहा है।

