देश के विकास में हिन्दी एवं प्रादेशिक भाषाओं का विज्ञान में प्रयोग जरूरी
रासप्रौसं में हिन्दी पखवाड़े का शुभारंभ

आईआईएन/चेन्नई, @Infodeaofficia
राष्ट्रीय समुद्र प्रौद्योगिकी संस्थान (रासप्रौसं) में हाल ही हिन्दी पखवाड़े की शुुरुआत हुई। मुख्य अतिथि एवं वक्ता डॉ. डीडी ओझा थे। संस्थान के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी वी. शंकर रामसुब्रमण्यन ने स्वागत भाषण एवं पखवाड़े के दौरान आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की जानकारी दी।
इस मौके पर मुख्य अतिथि ने बताया कि भारत जैसे विकासशील देश में देशवासियों में विज्ञान चेतना जाग्रत करने एवं उनका सामाजिक स्तर बढ़ाने के लिए हिन्दी एवं प्रादेशिक भाषाओं का विज्ञान में प्रयोग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा मात्र अंग्रेजी के ज्ञान से ही देश का विकास असंभव है।
वायु प्रदूषण एवं स्वास्थ्य के विषय पर तकनीकी व्याख्यान में डॉ. ओझा ने बताया कि समूचा विश्व वायु प्रदूषण की त्रासदी से ग्रस्त है, इससे भारत भी अछूता नहीं है। उन्होंने वायु प्रदूषण को रोकने के उपाय भी सुझाए।
रासप्रौसं के डॉ. डी. राजेशखर, समूह प्रमुख (वैज्ञानिक-जी) ने बताया रासप्रौसं में हिंदी के प्रगामी प्रयोग की गति निरंतर बढ़ रही है तथा वैज्ञानिकों का रुझान भी विगत वर्षों में हिंदी के प्रयोग में बढ़ रहा है, जो कि एक अच्छाई का सूचक है।
एनसीसीआर के प्रभारी डॉ. शिशिर कुमार दास ने बताया कि जब तक वैज्ञानिक साहित्य, देशवासियों की भाषा में नहीं होगा तब तक देश का विकास अधूरा ही रहेगा। कार्यालय के कार्मिक विभाग ने कार्यशाला में भाग लिया। नीतू ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

