‘आषुयमान भारत की तर्ज पर तमिलनाडु में बनेगा सिद्धा-आर्युवेद बोर्ड: पांडिराजन

रीतेश रंजन, आईआईएन/चेन्नई, @Royret
तमिलनाडु की पारम्परीक चिकित्सीय अभ्यास सिद्धा-आर्युवेद को पहचान दिलाने के लिए राज्य सरकार ‘आष्युमान भारत’ की तर्ज पर सिद्धायोगा बोड के गठन की योजना पर विचार कर रही है।
तमिलनाडु के चेन्नई स्थित ‘विश्व तमिल शोध केंद्र’ में आयोजित कार्यक्रम में तमिल आधिकारिक भाषा, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के मंत्री के पांडीराजन ने कहा कि मौजूदा दौर में लोगों में किसी भी बिमारी के ईलाज के लिए एलोपेथी दवा खाने का चलन ज्यादा है जबकि इसके कई दुषप्रभाव भी है। वहीं सिद्धा व आर्युवेद से कई बिमारियों का जड़ से निकारण कर लिया जाता है और इसका कोई दुषप्रभाव भी नहीं है।
इंफोडिया के साथ विशेष बातचीत में पांडिराजन ने कहा कि सिद्धा मेडिसीन तमिलनाडु की पारम्परिक चिकित्सीय प्रणाली का हिस्सा है। तमिलनाडु सरकार इसकों बढ़ावा देने के लिए काफी प्रयास कर रही है। सिद्धा मेडिसीन के कई अभ्यास के दस्तावेज नहींं है। इन क्षेत्रों में भी तमिलनाडु सरकार काफी काम कर रही है। जिसपर डा. एमजीआर मेडिकल विश्वविद्यालय भी काम कर रहा है।
तमिल विश्वविद्वालय में भी इसके लिए हमने एक विभाग बनाया है। हम कुछ शेध केंद्रों को स्थापित करने पर भी काम कर रहे हैं। एलोपेथी चिक्तिसा जगत जिसप्रकार से साक्ष्य व प्रयोग आधारित कार्य करती है हम भी उसी प्रकार से इसपर काम कर रहे हैं।
गौरतलब है कि तमिलनाडु में 50 हजार के उपर सिद्धा एवं आर्युवेद चिकित्सा पद्धती का अभ्यास करने वाले हैं। अभी भी ऐसे कई लोग हैं जो इस चिकित्सा पद्धती मेें काफी विश्वास रखते हैं।
तमिलनाडु सरककार इस चिकित्सा प्रणाली को एक बेहतर रूपरेखा देने पर काफी सालों से काम कर रही है। चेन्नई के अन्नानगर स्थित सरकारी कॉलेज को अंतररराष्ट्रीय ख्याती प्राप्त है।
यह कॉलेज सिद्धा चिकित्सीय अभ्यास के ज्ञान को बढ़ावा देने के क्षेत्र में काम कर रहा है, जिससे कि इसका अभ्यास करने वाले लोगों व इस अभ्यास को पहचान के साथ मान्यता भी मिले।

