नई शिक्षा नीति नालंदा, तक्षशिला के वैभव की ओर जाने का रास्ताः उपराष्ट्रपति

आईआईएन/नई दिल्ली, @Infodeaofficial
उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कहा कि भारत में विश्वस्तरीय नालंदा और तक्षशिला शिक्षा संस्थान थे। अभी ऐसी स्थिति नहीं है। नई शिक्षा नीति भारत को वैश्विक शिक्षा हब बनाने में सफल होगी। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे नई शिक्षा नीति के मसौदे पर इस महीने की 15 तारीख तक अपने सुझाव प्रदान करे।
नायडू ने कहा कि समग्र और मूल्य आधारित शिक्षा अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार प्रदान करेगी। नायडू ने प्रो. जे.एस. राजपूत की पुस्तक ‘द डायनिमिक्स ऑफ इंडियन एजुकेशन’ का विमोचन किया। उन्होंने भारतीय शिक्षा की चुनौतियों के बारे में अपने विचार व्यक्ति किए।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा प्रणाली पर नया दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है। मैंने निरंतर यह बात कही है कि शिक्षा प्रणाली में बदलाव की जरूरत है ताकि हमारे विश्वविद्यालय विश्वस्तरीय हो सके और भारत का शिक्षा का हब बनाया जा सके। मुझे प्रसन्नता है कि नए शिक्षा नीति के मसौदे में कुछ ऐसे सुझाव है जो भारत को वैश्विक शिक्षा हब बनाने की क्षमता रखते है।
नायडू ने कहा कि प्राथमिक शिक्षा में मातृ भाषा को माध्यम बनाया जाना चाहिए। भारत की ज्ञान परम्परा के बारे में श्री नायडू ने कहा कि जर्मनी के कई विश्वविद्यालय संस्कृत भाषा को बढ़ावा दे रहे है ताकि भोज पत्रों पर लिखी बातों को समझा जा सके।
इस अवसर पर पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि भारत सदियों से ज्ञान की भूमि रहा है। पैगम्बर मोहम्मद ने कहा था कि मक्का में बैठकर मुझे भारत के ज्ञान की ठंडी हवा मिल रही है। मैं एक अरब हूं, लेकिन मुझमें अरबीपन नहीं है मैं भारतीय नहीं हूं, लेकिन मुझमें भारतीयता है।
प्रो. राजपूत, लोकसभा के पूर्व महासचिव सुभाष कश्यप और प्रसार भारती के चेयरमैन ए. सूर्यप्रकाश ने भी भारतीय शिक्षा के विभिन्न आयामों पर अपने विचार व्यक्त किए।

