सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा

आईआईएन/नई दिल्ली, @Infodeaofficial
सड़क सुरक्षा से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को “गोल्डन ऑवर” अवधि में सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा की योजना तैयार करने का निर्देश दिया है। गंभीर चोट के बाद पहले 1 घंटे को (golden hour) इलाज के लिए सबसे अहम माना जाता है। कोर्ट ने कहा कि कई मामलों में अगर golden hour के दौरान ज़रूरी उपचार नहीं मिलता है, तो घायलों की जान जा सकती है।
जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 162 के तहत केंद्र सरकार पर गोल्डन ऑवर के दौरान दुर्घटनाओं के पीड़ितों के कैशलेस उपचार की ज़िम्मेदारी है। कोर्ट ने कहा कि हादसे के शिकार के करीबी और परिजन उसके आस-पास नहीं होते हैं।
इसलिए, उसकी मदद करने वाला कोई नहीं होता है। घायल व्यक्ति को गोल्डन ऑवर में आवश्यक उपचार मिलना चाहिए। अक्सर गोल्डन ऑवर में ज़रूरी इलाज से मना कर दिया जाता है। अस्पताल कभी-कभी पुलिस के आने तक इंतजार करते हैं। ऐसे में कैशलैस योजना ज़रूरी है। कोर्ट 24 मार्च को दोबारा सुनवाई करेगा।

