भारत को अगले कुछ सालों में आयात नहीं करना पड़ेगा सोना

वित्तमंत्री को सौंपा ज्ञापन

आईआईएन/चेन्नई, @Infodeaofficial 

गामी कुछ सालों में भारत को बाहर के देशों से सोना आयात करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। देश में ही भारी मात्रा में अनुपयोगी सोना पड़ा है, जो सरकार के पास आ जाए तो बाहर के देशों से सोना मंगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

यह कहना है मद्रास ज्वेलर्स एंड डायमंड मर्चेंट एसोसिएशन (एमजेडीएमए) का। हाल ही एमजेडीएमए के सदस्यों ने वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर उन्हें इस संबंध में एक ज्ञापन सांैपा।

इस ज्ञापन में उन्होंने वित्तमंत्री से आग्रह किया है कि भारत में 25 हजार अनुपयोगी का सोना है जो लोगों के घरों में बेकार पड़ा है। ये सोना यदि बाजार में आ जाए तो भारत की अर्थव्यवस्था में बहुत सुधार आएगा।

सोने पर लोन देने की प्रक्रिया अभी भी लोगों के बीच लोकप्रिय नहीं हुई है इसलिए जरूरी है कि ज्वेलरी और डायमंड मर्चेंट को इस काम में शामिल किया जाय। लोग ज्वेलर्स के पास से ही आभूषण खरीदते हैं।

अगर उसी आभूषण को बैंक के पास जमा करने और उस पर ब्याज और ग्रेच्युटी की व्यवस्था हो तो सरकार और लोग दोनों का फायदा होगा। इसके लिए लोगों को प्रेरिरत करने की जरूरत है जो एक आभूषण व्यापारी ही कर सकता है।

आभूषण व्यापारी ही लोगों को सोने के आभूषण बेचता है और उनके पास आने वाले ग्राहक काफी सालों से उनसे जुड़े रहते हैं। ऐसे में एलआईसी की तरह बैंकों को आभूषण व्यापारियों को अपना एजेंट बनाना चाहिए ताकि वह लोगों को सोना बैंक में जमा करने के लिए प्रेरित कर सकें और उसके बदले इन व्यापारियों को कमीशन मिल सके।

अच्छे दिन आने वाले हैं

इस मुलाकात के बारे में विशेष जानकारी देते हुए एमजेडीएमए के अध्यक्ष जयंतीलाल छल्लाणी ने बताया कि देश जिस आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहा है उससे ज्वेलरी मार्केट भी अछूता नहीं है। इस मंदी के दौर में ज्वेलरी व्यवसाय में 30 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है लेकिन व्यापारी इस बात से भयभीत नहीं हैं।

आने वाले दिन हमारे लिए अच्छे आने वाले हैं। सितम्बर महीने के बाद दशहरा, दिवाली और शादियों का मौसम शुरू होने वाला है। ऐसे में बाजार से खरीदारी बढ़ेगी जिससे व्यवसाय बढ़ेगा और मुनाफा भी। सोना भारत के लिए ही नहीं बल्कि विश्वभर के लिए एक वैकल्पिक मुद्रा है। यही कारण है कि लोग सोने में निवेश करते हैं।

उन्होंने बताया कि मंदी के असर से हमने अपने साथ काम करने वाले किसी भी कामगार को नहीं निकाला है। हमारे यहां काम करने वाले हमारी तरह कई पीढिय़ों से काम कर रहे हैं इसलिए किसी भी परिस्थिति में मंदी के दौर में हम अपने कामगारों को बाहर नहीं निकालते।

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