लॉक डाउन में फसे लोगों की मदद को आया गुरुनानक कॉलेज व होम गार्ड

रीतेश रंजन, आईआईएन/चेन्नई, @Royret
देशभर में जब लॉकडॉन की घोषणा की गई तो इस फैसले से कई प्रवासी मजदूर विभिन्न प्रदेशों में प्रभावित हुए जो अपने प्रदेश को छोड़कर के बाहर के प्रदेश में काम की तलाश में गए थे। इनमें से कई ऐसे थे जो कि लॉकडाउन शुरू होने से पहले अपने घर को वापस होना चाहते थे लेकिन यह जहाँ रहते थे वहाँ से इन लोगों ने अपनी यात्रा शुरू तो की लेकिन गंतव्य स्थान पर नहीं पहुँच सके और बीच में ही अटक गए |
सभी प्रदेश की सरकारों ने अपनी ओर से हरसंभव व्यवस्था की जिससे इन मजदूरों के रहने और खाने का इंतजाम हो सके। तमिलनाडु में भी इसी प्रकार से यहाँ अटके प्रवासी मजदूरों के लिए इंतजाम किए गए। लेकिन यहाँ की सबसे बड़ी खासियत ये है कि यहां कई स्वयंसेवी संस्था, गैर सरकारी संस्था और व्यक्ति सामने आए और लॉकडाउन के बाद से ऐसे लोगों की मदद कर रहे हैं।
तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में स्थित गुरु नानक कॉलेज में ऐसे ही प्रवासी मजदूरों के रहने की व्यवस्था की गई है। और आपको बता दूँ कि राज्यभर में यह अकेला कॉलेज है जो ऐसे प्रवासी मजदूरों को शरण दे रहा है। गुरु नानक कॉलेज की खास बात यह है कि इसने हर आपदा में राज्य सरकार के साथ मिलकर के लोगों की मदद करने के लिए सबसे पहले कदम उठाया।
चेन्नई सिटी होमगार्ड के असिस्टेंट कमांडेंट जनरल और गुरुनानक कॉलेज के कोरेस्पोंडेंट मनजीत सिंह नायर कहते है की 2015 में चेन्नई में आई बाढ़ के दौरान भी कॉलेज ने अपने परिसर में कॉलेज के कर्मचारियों व स्वयंसेवी संगठनों के साथ मिलकर के भोजन तैयार कर प्रभावित लोगों में भोजन बांटा था। जिस दिन सम्पूर्ण लॉकडाउन की घोषणा की गई उसके दो ही दिन बाद राज्य के मुख्य सचिव, डीजीपी और पुलिस आयुक्त के साथ गुरु नानक कॉलेज के कोरेसपोंडेंट मनजीत सिंह नायर ने बैठक की।
इन्होंने होमगार्ड और एनसीसी की मदद से कॉलेज में एक शिविर लगाया जिसमें 385 उड़ीसा के प्रवासी मजदूरों को रखा गया है। मनजीत सिंह बताते हैं कि इन मजदूरों को यहाँ लाने से पहले इनका कोविड-19 टेस्ट कराया गया उसके बाद ही है इन्हें शरण दिया गया। उनके इस कार्य में संगठन भी सहयोग कर रहे हैं। यहाँ इन्हें खाने, पीने और चिकित्सा जैसी हर प्रकार की सुविधा दी जा रही है।
चेन्नई नोट के एरिया कमांडर संजय भंसाली बताते हैं कि यहां उड़ीसा के मजदूरों के अलावा बिहार झारखंड के रहने वाले प्रवासी मजदूर जो आसपास के इलाकों में कंस्ट्रक्शन साइट व जगहों में अटके पड़े हैं और जिनकी संख्या 100 से ज्यादा है उन्हें भी खाना मुहैया कराया जाता है।
वो लोग अपने ठिकानों से यहाँ आते हैं और सुबह, दोपहर और शाम का भोजन लेकर अपने ठिकानें पर वापस चले जाते हैं। देश के अन्य राज्यों में प्रवासी मजदूरों में बढ़ रहे असंतोष की घटना को देखते हुए तमिलनाडु सरकार काफी बेहतरीन प्रयास कर रही है और उनके दिशा निर्देशों का अनुसरण करते हुए इन मेहमानों के लिए मनोरंजन के लिए टीवी, योगा और मेडिटेशन क्लास की व्यवस्था की गई है। जिससे की इन लोगों में मानसिक असंतोष पैदा न हो और यह लोग मानसिक रूप से सुदृढ़ रहें।

