लॉक डाउन और पलायन उधोग जगत को करेगा प्रभावित

आईआईएन/चेन्नई, @Infodeaofficial
लॉक डाउन के 60 दिन पूरे होने के बाद केंद्र सरकार ने इसकी अवधि 31 मई तक और बढ़ा दी है। इसी बीच केंद्र सरकार ने यह भी घोषणा कर दी कि प्रवासी मजदूरों को उनके घर ले जाने के लिए एक विशेष श्रमिक ट्रेन चलाना शुरू कर दिया। अब भरी संख्या में मजदुर तमिलनाडु से अपने प्रदेश लौटने की जद्दोजहद में लगे हुए है।
प्रवासी मजदूरों के पलायन से तमिलनाडु के कई उद्योग धंधों पर भारी असर पड़ेगा। इस संबंध में टीम इनफोडिया ने उधोग जगत के कुछ लोगों से बातचीत की और पता चला की मजदूरों के पलायन से विभिन्न उधोग जगत को काफी नुक्सान पहुंचेगा। इसकी भरपाई कब और कैसे हो पाएगी इसके बारे फिलहाल कुछ भी नहीं कहा जा सकता है।
मजदूरों के पलायन से रियल स्टेट को बहुत बड़ा नुकसान
रियल स्टेट कंपनी से जुड़े डी के जैन का कहना है कि रियल स्टेट का व्यवसाय पूर्णता प्रवासी मजदूरों पर निर्भर करता है, खास तौर पर यूपी बिहार के लोगों पर।
अब जब ये श्रमिक यहां से चले जाएंगे तो इससे उन्हें और उनके क्षेत्र में काम करने वाले काफी लोगों को नुकसान होगा।
वह कहते हैं कि लोगों में डर का माहौल बन चुका है इसलिए सभी लोग अपने घर वापस जाना चाहते हैं। जब तक इस बीमारी की दवा ना आ जाए तब तक लोग अपने घरों से वापस नहीं आएंगे और तब तक रियल स्टेट का धंधा जो है अधर में लटका रहेगा।
जैन बताते हैं कि सरकार जीएसटी, ब्याज दरों में छूट दे तभी रियल एस्टेट का व्यवसाय तेजी से आगे बढ़ेगा।
व्यवसाइयों को अल्पकालीन कर्ज दे बैंक
वहीं तमिलनाडु का जाना माना परिधान स्टोर नल्ली सिल्क के मालिक डॉक्टर नल्ली कुप्पूस्वामी स्वामी का कहना है कि केंद्र सरकार ने लॉक डाउन की अवधि बढ़ा दी है और यह कब तक बढ़ती रहेगी इसका अंदाजा किसी को भी नहीं है।
ऐसे में हमारे ऊपर अपने स्टोर का किराया बिजली बिल आदि के साथ अपने कर्मचारियों को वैतनिक अवकाश का बोझ बढ़ता ही जा रहा है। एक तरफ आमदनी रुकी हुई है वहीं खर्च पर कोई रोक नहीं। प्रधानमंत्री के आग्रह पर हमने अपने कर्मचारियों को वैतनिक अवकाश दे दिया है।
लेकिन अगर यह सिलसिला जारी रहता है और हमें यह मदद अपने कर्मचारियों के लिए जारी रखनी है तो इसके लिए बैंकों को हमारी मदद करनी चाहिए। बैंक हमें एक शॉर्ट टर्म के लिए लोन आवंटित कर सकता है, जिसे हम 6 महीने व डेढ़ साल में चुकाएंगे। इसे हम पर बोझ भी नहीं बढ़ेगा और कर्मचारियों का लाभ भी होगा।
शेयर बाजार में सम्हल कर करें निवेश
रविकांत चौधरी, एएसएल कैपिटल होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड का कहना है कि लॉक डाउन की वजह से आने वाले दिनों में शेयर मार्केट की स्थिति में गिरावट देखने को मिलेगी लेकिन सरकार ने जैसा वादा किया है कि एमएसएमई और एसएमई के लिए सरकार यदि आर्थिक पैकेज लेकर के आती है तो में सुधार जरूर आएगा।
फिलहाल फार्मा इंडस्ट्री से जुड़े शेयरों में काफी उछाल आ रहा है क्योंकि अभी इनकी डिमांड ज्यादा है।
वह बताते हैं कि अभी निवेश करने का हो तो एक साथ ज्यादा निवेश करने से बचे। अभी 10 से 20 प्रतिशत ही निवेश करे कोरोंना की दवा या वैक्सीन मिल जाती है तो मार्केट में जरूर उछाल आएगा।
बिजनेसमन को सरकार करे सपोर्ट तभी और परिवार के घरों में जलेंगे चूल्हे
जीतो के चेयरमैन दौलत जैन का कहना है कि हमने लॉक डाउन के बाद से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री राहत कोष में योगदान दिया है।
इसके अलावा हम लॉक डाउन मे फसे प्रवासी मजदूरों को अपनी संस्था की ओर से रोज भोजन या भोजन सामाग्री मुहैया करा रहे हैं।होटल इंडस्ट्री इस लॉक डाउन से काफी प्रभावित हुआ है।
टूरिज्म बंद होने की वजह होटल इंडस्ट्री पर काफी प्रभावित हुआ है और आने वाले दिनों में स्थिति में कोई सुधर आएगी ऐसा जान नहीं पड़ रहा है। लॉक डाउन पीरियड में बैंक को ब्याज दर माफ़ करना चाहिए। अगर सरकार बिजनेसमन को सपोर्ट करे तो उससे कई परिवारों को भी सपोर्ट मिलेगा।
लॉक डाउन खुलने पर ही लिथियम फैक्ट्री का काम होगा शुरू
तमिलनाडु के उद्योगपति मुनोथ इंडस्ट्रीज के डायरेक्टर जसवंत मुनोथ जो कि भारत में लिथियम सेल फैक्ट्री की शुरुआत कर रहे हैं। इस बैट्री का निर्माण सिर्फ आंध्र प्रदेश के तिरुपति में हो रहा है।
मुनोथ बताते है कि लॉक डाउन की वजह से उनकी कंपनी का निर्माण कार्य रुक गया है। इस कंपनी का निर्माण कार्य जून-जुलाई में पूरा हो जाना था लेकिन अब इसे सितंबर अक्टूबर तक पूरा किया जा सकेगा।
वही जो टेक्नोलॉजी चाइना से लाई गई है उन मशीनों को सेट करने के लिए चाइना से इंजीनियर को आना है। लेकिन इंटरनेशनल फाइट बंद होने की वजह से वह यहां नहीं आ सकते हैं। आशा करते हैं कि अक्टूबर-नवंबर में परिस्थितियां बदलेंगे तो फिर उनके कंपनी का काम आगे शुरू हो पाएगा।
दवा निर्माण में चीन पर ख़तम होगी निर्भरता
शासुन फार्मास्यूटिकल्स कंपनी के चेयरमैन अभय कुमार श्रीश्रीमाल बताते हैं कि फार्मास्यूटिकल्स कंपनी होने के कारण उन्हें सरकार और प्रशासन की तरफ से काफी मदद मिली।
जिन जिन प्रदेशों में या जिलों में उनकी कंपनी इकाई है वह प्रशासन की ओर से हर प्रकार की मदद मिल रही है।
वह दवा तैयार कर भारत और भारत से बाहर भी भेजा करते हैं। हां बीते कुछ दिनों में उन्हें कच्चे माल की आपूर्ति में जरूर समस्या आई है लेकिन उसका भी हल खोज लिया गया है।
वह बताते हैं कि दवा के मामले में अधिकांश देश चाइना पर निर्भर करते थे! लेकिन अब वह स्थिति नहीं है भारत के पास भी रिसर्च डेवलपमेंट के काफी संसाधन हैं!
अब यहां पर भी दवाइयों का निर्माण किया जा सकता है और आने वाले दिनों में भारत में तैयार की गई दवाइयां विश्व भर में भेजी जाएंगी इसलिए यह एक बेहतर अवसर है भारत को अपनी क्षमता दिखाने का!

