अंतरिम बजट से अच्छे दिन

आईआईएन/चेन्नई, @Infodeaofficial

वेतनभोगियों के अलावा केंद्र सरकार का अंतरिम बजट उद्योग जगत को भी रास आया है। उद्यमियों की मानें तो मौजूदा सरकार के इस आखिरी बजट ने उद्योग जगत के लिए अच्छे दिन का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। आभूषण व्यापारियों व रियल एस्टेट उद्यमियों की दृष्टि से बजट सामान्य था। कुछ यहीं हाल शिक्षा क्षेत्र का भी है।

इस बजट की सबसे प्रमुख बात केंद्र सरकार की आगे की दस साल की योजना है।

इसमें प्रमुख रूप से उद्योग-धंधों एवं आधारभूत ढ़ांचों के विकास पर ध्यान देने की बात कही गई है। एन.के. रंगनाथ, पूर्व चेयरमैन, सीआईआई तमिलनाडु

 

अंतरिम बजट में सरकारी खजाने को लुटाया नहीं गया है।

हमें आशा है कि आने वाले बजट में उद्योग-धंधों के विकास को भी प्रमुखता दी जाएगी और अच्छे दिन आएंगे। टेक्सटाइल निर्यातक रवि सैम

 

जेवर व्यपारियों को कोई लाभ नहीं

केंद्र सरकार के इस अंतरिम बजट में जेवर व्यपारियों के लिए कुछ भी नहीं है। कोई राहत नहीं दी गई है।

लंबे समय से सोना आयात पर कर घटाने की मांग करने के बावजूद उसमें अभी भी कोई कटौती नहीं की गई है। कुल मिलाकर जेवर व्यपारियों के लिए यह बजट निराश करने वाला है। जयंतीलाल छल्लानी, हीरा व्यवसाई

 

उच्च मध्यमवर्गीय व उच्च वर्ग के लिए बजट में कुछ खास नहीं

अंतरिम बजट में उच्च एवं उच्च मध्यमवर्गीय वर्र्गें की अंदेखी की गई है।

चुनाव को ध्यान में रखते हुए लोक-लुभावन बजट तैयार किया गया है।

भले ही केंद्र सरकार ने इस बजट में वंचित लोगों को लाभ दिया हो लेकिन रियल स्टेट व्यापारियों को तो इससे निराशा ही हाथ लगी है। सुनिल खेतपालिया, चेयरमैन, केएलपी प्राइवेट लिमिटेड

 

शिक्षण संस्थानों को इस अंतरिम बजट से काफी अपेक्षा थी लेकिन पीयूष गोयल द्वारा पेश किए गए इस बजट ने उनकी उ मीदों पर पानी फेर दिया। सरकार को सरकारी के साथ-साथ निजी शिक्षण संस्थानों को भी अनुदान देना चाहिए।

बतौर शिक्षाविद मेरा मानना है कि बिना किसी भेदभाव के दोनों तरह के संस्थानों को अनुदान देने से शिक्षा के स्तर तथा रोजगार के अवसर दोनों में सुधार होगा। टी. पारिवेंदर, चेयरमैन, एसआरएम ग्रुप

आमदनी में बढ़ौतरी नहीं, कर में राहत मजाक समान

केंद्र सरकार ने शुक्रवार को जो अंतरिम बजट पेश किया है उसमें कर माफी कर उन लोगों के साथ मजाक किया गया है जो काफी सालों से आमदनी में बढ़ौतरी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

अर्थिक रूप से पिछड़े हुए लोगों को कर में राहत देने के बजाय सरकार को उनकी आमदनी बढ़ाने के उपायों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए था। यह बजट मध्यमवर्गीय लोगों के लिए सही नहीं है पर वहीं इसमें शहरों में रहने वाले उच्च मध्यमवर्गीय लोगों के लिए कोई राहत नहीं दी गई है। अरुना विजय, वर्किंग प्रोफेशनल

बिजनस क्लास लोगों के लिए कुछ भी नहीं

केंद्र सरकार के अंतरिम बजट में किसानों और मध्यमवर्गीय लोगों का ख्याल रखा गया है। यह लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर बनाया गया बजट प्रतीत होता है।

लेकिन उनलोगों के साथ सरकार ने अबतक कोई न्याय नहीं किया जो अपनी मेहनत कर खुद के लिए बेहतर मकाम बनाते हैं। मध्यम उच्च और उच्च वर्ग के लोगों को बजट में कहीं भी कोई खास लाभ नहीं दिया गया है। श्वेता कोचर, एसोसिएट पार्टनर, प्रकाश कोचर एंड को

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना किसानों के लिए निश्चय ही उत्तम योजना है| इस योजना के तहत किसानों को प्रत्येक वर्ष ₹6000 की राशि दी जाएगी|

इसके तहत 10 करोड़ किसान लाभान्वित होंगे| उन्होंने कहा कि इस बजट में किसानों के साथ साथ मध्यमवर्गीय परिवारों का भी ध्यान रखा गया है|रिंकू संकलेचा, गृहिणी

मुंगेरीलाल के हसीन सपने दिखा रहें है मोदी

बड़े खेद के साथ यह कहना पड़ रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोगों को मुंगेरीलाल के हसीन सपने दिखा रहें है। किसानों की हित की बात तो करते हैं लेकिन बस ढ़ाक के तीन बराबर चाल है।

प्रत्येक वर्ष ₹6000 की राशि कोई स्थाई हल नहीं है| किसानों केंद्र सरकार उन्हें लॉलीपॉप दे रही है|यह बजट केवल मध्यम वर्गीय लोगों को ध्यान में रखकर बनाया गया है|अय्याकानू, किसान नेता,

 

आयकर में ₹500000 की छूट से मध्यमवर्गीय परिवारों को काफी राहत मिलेगी|

किसानों के लिए भी सरकार ने सराहनीय फैसले लिए हैं| केंद्र सरकार ने आधारभूत ढांचे के विकास पर ध्यान जो बात कही है उससे उत्तर-पूर्व राज्यों को काफी लाभ मिलेगा|टीना धारीवाल, सहायक प्रोफेसर, ए•एम जैन कॉलेज

यह तो सिर्फ टेर्लर मात्र है

मोदी के काम का असर तो अब दिखना ही शुरू हुआ है। केंद्र सरकार ने जो राजस्व के माध्यम से कमाया उसे अब गरीब जनता को धीरे-धीरे कर वापस कर रही है।

यह तो सिर्फ टेर्लर मात्र है। आनेवाले लोकसभा चुनाव में मोदी की जीत के बाद अभी बहुत एसे कार्य है जिसका फायदा जनता को मिलेगा। जसबीर कौर, गृहिणी

 

 

 

 

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