मौजूदा दौर में महिलाएं पहले से ज्यादा असुरक्षित

मौजूदा दौर की सबसे बड़ी जरूरत यही है कि हम महात्मा गांधी के जीवन से प्रेरणा ले और उनके बताए सिद्घांतों का अनुसरण करें।

आईएनएन/चेन्नई, @Infodeaofficial

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय संगोष्ठी

ज के माहौल में महिलाएं पहले से ज्यादा असुरक्षित हैं। आए दिन अखबारों और समाचारपत्रों में आपकों एसी कई घटनाएं सुनने और देखने को मिलेंगी जिसमें महिलाओं के साथ हुए इस प्रकार के कुकृत्य का जिक्र होता है। गांधी के देश में आज क्या हो रहा है।

एमओपी वैष्णव महिला महाविद्यालय और केंद्रीय हिंदी निदेशालय, नई दिल्ली के संयुक्त तत्त्वावधान में गुरुवार को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के 150वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन के मौके पर जानी-मानी साहित्यकार ममता कालिया ने कहा कि चारों ओर हिंसा का बोलबाला है। मौजूदा दौर की सबसे बड़ी जरूरत यही है कि हम महात्मा गांधी के जीवन से प्रेरणा ले और उनके बताए सिद्घांतों का अनुसरण करें। वह समारोह में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रही थी।

एमओपी महाविद्यालय प्रेक्षागृह में ‘वर्तमान युग में गांधी विचारधारा की आवश्यकता’ विषयक संगोष्ठी में उन्होंने कहा कि हिंसक भीड़ सरे बाजार किसी भी हत्या कर देती है। भीड़ को आम आदमी और वर्दीधारी में कोई फर्क महसूस नहीं होता और न ही इसपर किसी का बस चलता है। शर्म की बात है कि यह सब गांधी के देश में हो रहा है।

गांधी ने कहा था कोई भी लड़ाई हथियारों के बल पर नहीं जीती जा सकती। अपनी जनशक्ति, मनशक्ति व मनोबल को हथियार के रूप में काम में लें। पश्चिम के मोह को कम करने की जरूरत है। महात्मा गांधी ने आजादी की चेतना पैदा की। उन्होंने अहिंदी भाषी होते हुए भी हिंदी की आचार-पद्धति को अपनाया।

प्रसिद्ध साहित्यकार सूर्यबाला ने कहा, गांधी पूरे विश्व का गौरव हैं। आज की पीढ़ी को गांधी की अधिक जरूरत है। सादगी, मितव्ययिता व संतोष ही उनका सपना था। हिंदी किसी एक की भाषा नहीं है। दरअसल हिंदेतर लोगों ने ही हिंदी को संभालकर रखा है।

संगोष्ठी की संयोजक डॉ. सुधा त्रिवेदी ने कहा, हम गांधी के विचारों से बहुत दूर हो चुके हैं।

उनको आदर्श मानने के लिए तैयार भी हंै लेकिन जीना अंग्रेजी की तरह चाहते हैं। गांधी के विचारों की प्रासंगिकता आज भी आवश्यक है।

केंद्रीय हिंदी निदेशालय चेन्नई के उपनिदेशक श्रीनिवासन ने कहा, निदेशालय की विस्तार कार्यक्रम योजना के तहत राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं नवलेखन शिविर होता है व प्रति वर्ष दो बार राष्ट्रीय संगोष्ठी होती है। एक हिंदीभाषी क्षेत्र व दूसरी हिंदेतर प्रांत में। एमओपी वैष्णव महिला महाविद्यालय एवं दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के हिंदी के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की। प्रचार सभा के बारे में कहा कि तमिलनाडु में विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हिंदी को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत है।

प्रचार सभा की शिक्षा समिति के अध्यक्ष एस. पार्थसारथी ने कहा, गांधी के सपने को साकार करने की दिशा में प्रचारसभा लगातार कार्यरत है। तमिलनाडु में हिंदी का विरोधाभास नहीं है और अगर कभी विरोध हुआ भी तो प्रचार सभा ने हिंदी को लेकर दुगुना-चौगुना प्रयास किया है।

महासचिव एस. जयराज ने कहा, दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा का प्रचारक मोहल्ले, गली व घर-घर जाकर पढ़ाने का काम करता है। अक्षर व भाषा सिखाने का काम प्रचार सभा बखूबी कर रही है।
कॉलेज प्राचार्य डॉ. ललिता बालकृष्णन ने स्वागत भाषण में हिन्दी की महत्ता बताई। डॉ. मंजू रुस्तगी, डॉ. स्वाति पालीवाल, डॉ. मनोजकुमार सिंह, डॉ. सुनीता जाजोदिया ने अतिथियों का परिचय दिया।

उद्घाटन समारोह में हैदराबाद की साहित्यकार डॉ. अहिल्या मिश्रा, साहित्यकार ओम निश्छल, डॉ. लता चौहान, डॉ. अमरज्योति, डॉ. नजीम बेगम, रमेश गुप्त नीरद, एस.के. गोयनका, प्रचार सभा के पीआरओ ईश्वर करुण, अनुुभूति के अध्यक्ष डॉ. ज्ञान जैन व महासचिव गोविन्द मूंदड़ा, प्रहलाद श्रीमाली, डॉ. अशोककुमार द्विवेदी, डॉ. हुसैन वल्ली समेत कई गणमान्य लोग मौजूद थे।

संगोष्ठी का समापन समारोह शुक्रवार को दोपहर 3.30 बजे होगा जिसमें सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के नृत्य एवं नाटक संभाग की चेन्नई शाखा की ओर से उपनिदेशक कुलदीप सागर और उनकी टीम द्वारा बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति भी दी जाएगी। इसके बाद प्रमाण पत्र वितरित किए जाएंगे।

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