दिल्ली महिला आयोग की नई पहल: महिला पंचायत

भरत संगीत देव ,आईएनएन, नई दिल्ली ; @infodeaofficial;  

 देश की राजधानी नई दिल्ली में महिलाओं के प्रति बढ़ रही घरेलू हिंसा ,मारपीट, बढ़ते अपराध आदि को रोकने के लिए और महिलाओं को जागरूक कर उनको सशक्त बनाने के लिए दिल्ली महिला आयोग ने एक नई शुरुआत की है जिसका नाम दिया गया है “महिला पंचायत”। महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए इसमें कई योजनाओं को शामिल किया गया है जिनके माध्यम से महिलाएं शक्तिशाली बनती है जिससे वो अपने जीवन से जुड़े हर फैसले स्वयं ले सकती है। परिवार और समाज में अच्छे से रह सकती है। समाज में उनके वास्तविक अधिकार को प्राप्त करने के लिए उन्हें सक्षम बनाना ही महिला पंचायत का मूल उद्देश्य रहेगा।
“नरेंद्र मोदी जी द्वारा महिला दिवस पर कहा गया मशहूर वाक्य “देश की तरक्की के लिये पहले हमें भारत के महिलाओं को सशक्त बनाना होगा”। एक बार जब महिला अपना कदम उठा लेती है, तो परिवार आगे बढ़ता है, गांव आगे बढ़ता है। राष्ट्र विकास की ओर बढ़ता है”। इस उद्देश्य को भी ध्यान में रखा गया है।
महिला पंचायत दिल्ली महिला आयोग द्वारा संचालित एक समूह है जिसके अंतर्गत एक को-ऑर्डिनेटर सहित चार लीगल कार्यकर्ता होती है। यह समूह एक ट्रस्ट के माध्यम से जुड़कर महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने का कार्य करता है। राजधानी में महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध, छेडख़ानी, घरेलू हिंसा, मारपीट, मानसिक तनाव ,बलात्कार, दहेज हत्या और विधवाओं से संबंधित समस्याओं और उनके अधिकारों से वंचित रखना इत्यादि को रोकने के लिए राजधानी के बहुत से ट्रस्टों (निर्भया ज्योति ट्रस्ट, नारी उत्थान समिति, नई पहल, नई मुस्कान फाउंडेशन आदि 103 ट्रस्ट शामिल हैं) को साथ लेकर प्रत्येक थाना क्षेत्र में एक एक पंचायत का कार्य क्षेत्र तय किया गया है। जिसके अंतर्गत महिलाओं से संबंधित केस, उनसे जुड़े मामले के समाधान के लिए महिला पंचायत का सहयोग लिया जायेगा । जिसके फलस्वरूप मामलों के निपटारे में तेजी लाई जा सके और उनका उन्मूलन किया जा सके। महिला पंचायत अपने अपने कार्य क्षेत्र में आसपास की महिलाओं को 25 स्वयं सेवकों की सहायता से इकठ्ठा करके सप्ताह में दो दिन मुलाकात करके उनसे जुड़ी सभी प्रकार की समस्याओं को सुनेगी, उनके अधिकारों की चर्चा की जाएगी, उनको संबंधित समस्या के समाधान के बारे में उपलब्ध जानकारियां दी जाएगी। उनसे परामर्श करके उस केस को स बंधित थाना प्रभारी के पास जाकर और अधिक जानकारी लेकर उसका समाधान करने का हर संभव प्रयास किया जाएगा। प्रताडि़त महिला के घर जाकर मूल परिस्थिति का पता लगाने के बाद उनको समझाया जाता है। पुरुष वर्ग को महिलाओं के प्रति उनके अच्छे व्यवहार के लिए प्रेरित किया जाता है। उनको हिंसात्मक कार्य करने से मना किया जाता है। महिलाओं को संसद द्वारा निर्धारित कानूनों के बारे में बताया जाता है। कानूनी अधिकार के साथ महिलाओं को सशक्त बनाने के लिये संसद द्वारा पास किये गये कुछ अधिनियम है।
-अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम 1956
-दहेज रोक अधिनियम 1961
-एक बराबर पारिश्रमिक एक्ट 1976
-मेडिकल टर्मनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट 1987
-लिंग परीक्षण तकनीक एक्ट 1994
-बाल विवाह रोकथाम एक्ट 2006
-कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन शोषण एक्ट 2013
जिस प्रकार से भारतीय समाज सुधारकों आचार्य विनोबा भावे, ईश्वरचंद्र विद्यासागर, स्वामी विवेकानंद, महात्मा ज्योतिराव फुले और सावित्री बाई फुले आदि ने भी महिला उत्थान के लिये अपनी आवाज उठायी और कड़ा संघर्ष किया। भारत में विधवाओं की स्थिति को सुधारने के लिये ईश्वर चंद्र विद्यासागर ने अपने लगातार प्रयास से विधवा पुनर्विवाह अधिनियम 1856 की शुरुआत करवाई, उसी प्रकार महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति जय हिंद के अथक प्रयासों से दिल्ली महिला आयोग ने महिला पंचायत का गठन करके एक मिसाल पेश कर दिया है। महिलाओं के लिए किये गए इस कार्य के लिए दिल्ली सरकार द्वारा निर्धारित फंड की सहायता से इस कार्यक्रम को आगे ले जाया जा रहा है।इसी के साथ ही महिलाओ की किसी भी प्रकार की शिकायत के लिए एक हेल्प लाइन नंबर 181 भी जारी किया गया है|इसी उद्देश्य के साथ समाज को जागरूक करने के साथ साथ महिलाओं को समानपूर्वक जीने का हक दिलाने के लिए निरन्तर प्रयास जारी है।

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