लॉक डाउन में राहत वरदान या अभिशाप

विष्णुदेव मंडल, INN/Chennai, @Infodeaofficial

कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रकोप को रोकने के लिए ही तमिलनाडु सरकार ने 19 जून से लेकर 5 जुलाई तक पूर्ण लॉकडाउन लगाई थी। सोमवार और मंगलवार को लॉक डाउन में छूट मिलने के बाद भारी संख्या में लोग सड़क पर नजर आए।

महानगर के सभी प्रमुख मार्ग मसलन अन्नासलाई, प्रकाशमसालै, राजाजीसालै, कामराजसालै, समेत अधिकांश सड़कों पर ट्रैफिक और लोगों की भीड़ देखने को मिली।

जहां रविवार तक सड़कों पर सन्नाटा नजर पसरा हुआ था, वही सोमवार को सभी मार्ग व्यस्त नजर आये। कई मार्गों पर सोशल डिस्टेंसिंग नाम की चीज़ दिख ही नहीं रही थी। आमजन में कोरोना महामारी के प्रति थोड़ा भी चिंता नजर नहीं थी। ऐसा प्रतीत हो रहा था चेन्नई महानगर करोना से मुक्त हो चुका है।

वैश्विक आफत के रूप में पहली बार कोरोना का जो परिदृश्य उभरा है उसने लोगों को विचलित कर दिया है।

लॉक डाउन में ढील देने के बाद सड़कों पर उत्तरी भीड़ को देख यह ज्ञात होता है की यहाँ लोगों कोरोना महामारी का बिलकुल भी भय नहीं है।

ईश्वर करूण, वरिष्ठ लेखक एवं कवि

सोमवार को जिस तरह सड़कों पर वाहनों का जमावड़ा दिखा उससे नहीं लगता कि शहर में किसी प्रकार का लॉकडाउन है।

आमजन को दैनिक कार्यों के लिए राहत देनी चाहिए लेकिन राहत का मतलब यह कतई नहीं कि लोग सड़कों पर भीड़ इकट्ठा हो जाए। पुलिस भी इस लॉकडाउन में छूट के बाद सड़क से गायब हैं।
                                                         विष्णु कांत तिवारी, समाजसेवी

पिछले 17 दिनों तक सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देश का पालन हुआ। लोग अपने घरों से बहार नहीं निकल रहे थे। अब जब लॉक डाउन में ढील दी गयी हैं लोग अपनी मनमानी कर रहे है।

सरकार को इस पर गौर करने की जरूरत है कहीं यह रियायत आफत में तब्दील ना हो जाए।

रवि कांत गुप्ता, ट्रांसपोर्टर

लॉक में छूट मिलने के बाद लोगों का हुजूम फिर से सड़कों पर दिखने लगा है। लोगों को यह नहीं भूलनी चाहिए की तमिलनाडु कोरोना महामारी संक्रमण के मामले में दूसरे स्थान पर है और हमारी सावधानी ही हमे इस महामारी से बचा सकती है। इसलिए हमें स्वयं और लोगों को जागरूक करने की जरुरत है।
जी राजेंद्रन, नौकरी पेशा

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