लॉकडाउन दो सप्ताह और बढ़ाया गया

आईआईएन/नई दिल्ली, @Infodeaofficial 

देश में कोविड-19 की स्थिति की व्यापक समीक्षा करने के साथ-साथ लॉकडाउन के उपायों से इसे नियंत्रण में रखने के रूप में हुए उल्‍लेखनीय फायदों को ध्‍यान में रखकर भारत सरकार के गृह मंत्रालय (एमएचए) ने लॉकडाउन को 4 मई, 2020 से दो सप्ताह और बढ़ाने के लिए आज आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत एक आदेश जारी किया।

इसके साथ ही गृह मंत्रालय ने इस अवधि में विभिन्न गतिविधियों या कार्यों के विनियमन के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए, जो देश के जिलों के रेड (हॉटस्पॉट), ग्रीन और ऑरेंज जोन में बदलने के जोखिम पर आधारित हैं। इन दिशा-निर्देशों में ग्रीन और ऑरेंज जोन में पड़ने वाले जिलों में काफी रियायतें या ढील दी गई है।

रेड, ग्रीन और ऑरेंज जोन के रूप में जिलों की पहचान करने के मापदंड के बारे में भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा 30 अप्रैल, 2020 को जारी किए गए पत्र में विस्तार से बताया गया है। ग्रीन जोन ऐसे जिले होंगे ज‍हां या तो अब तक संक्रमण का कोई भी पुष्ट (कन्‍फर्म) मामला नहीं आया है अथवा पिछले 21 दिनों में कोई पुष्ट मामला सामने नहीं आया है।

रेड जोन के रूप में जिलों का वर्गीकरण करते समय सक्रिय मामलों की कुल संख्या, कन्‍फर्म मामले दोगुनी होने की दर, जिलों से प्राप्‍त कुल परीक्षण (टेस्टिंग) और निगरानी सुविधा संबंधी जानकारियों को ध्यान में रखा जाएगा। वे जिले, जिन्हें न तो रेड जोन और न ही ग्रीन जोन के रूप में परिभाषित किया गया है, उन्‍हें ऑरेंज जोन के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा।

रेड, ग्रीन और ऑरेंज जोन के रूप में जिलों के वर्गीकरण को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ हर सप्‍ताह या आवश्यकतानुसार पहले साझा किया जाएगा। वैसे तो राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश कुछ और जिलों को रेड व ऑरेंज जोन के रूप में शामिल कर सकते हैं, लेकिन वे किसी ऐसे जिले के वर्गीकरण को घटा नहीं सकते हैं जिसे स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा रेड या ऑरेंज जोन की सूची में शामिल किया गया है।

देश के कई जिलों की सीमाओं में एक या एक से अधिक नगर निगम (एमसी) हैं। यह देखा गया है कि नगर निगमों के भीतर जनसंख्या घनत्व अधिक होने और लोगों का मिलना-जुलना अधिक होने के कारण नगर निगम की सीमा के भीतर कोविड-19 के मामले जिले के बाकी हिस्सों की तुलना में अधिक हैं।

अत: नए दिशा-निर्देशों में यह उल्‍लेख किया गया है कि ऐसे जिलों को दो जोन में वर्गीकृत किया जाएगा, अर्थात, नगर निगम की सीमा के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र के लिए एक जोन; और नगर निगम की सीमा के बाहर आने वाले क्षेत्र के लिए एक अन्‍य जोन।

यदि नगर निगम की सीमा के बाहर आने वाले क्षेत्र में पिछले 21 दिनों से कोई मामला सामने नहीं आया है, तो इसे रेड या ऑरेंज जोन के रूप में जिले के समग्र वर्गीकरण से एक पायदान नीचे के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा। अत: इस क्षेत्र को ऑरेंज के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा, यदि जिला समग्र रूप से रेड है; या ग्रीन के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा, यदि जिला समग्र रूप से ऑरेंज है।

इस वर्गीकरण से जिले के उस क्षेत्र में और भी अधिक आर्थिक एवं अन्य गतिविधियां या कार्य किए जा सकेंगे, जो कोविड-19 के मामलों से अपेक्षाकृत कम प्रभावित हैं और इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि निरंतर पूरी सावधानी बरती जाए, ताकि ये क्षेत्र आगे भी कोविड-19 के मामलों से मुक्त रहें। यह व्‍यवस्‍था केवल नगर निगम वाले जिलों के संबंध में ही की गई है।

कोविड-19 के फैलाव और रेड एवं ऑरेंज जोन के अंतर्गत आने की दृष्टि से देश के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों को नियंत्रण क्षेत्र (कंटेनमेंट जोन) के रूप में निर्दिष्‍ट किया गया है। ये ऐसे क्षेत्र हैं जहां संक्रमण फैलने का व्‍यापक जोखिम है।

कंटेनमेंट जोन को संबंधित जिला प्रशासन द्वारा परिभाषित किया जाएगा और ऐसा करते समय सक्रिय मामलों की कुल संख्या, उनके भौगोलिक फैलाव और कार्यान्‍वयन की दृष्टि से सुव्‍यवस्थित सीमांकन करने की आवश्यकता को ध्यान में रखा जाएगा।

स्थानीय प्राधिकारी कंटेनमेंट जोन के निवासियों के बीच आरोग्य सेतु एप की 100% कवरेज सुनिश्चित करेगा। कंटेनमेंट जोन के लिए गहन निगरानी प्रोटोकॉल होंगे जिनमें मरीज के संपर्क में आए लोगों का पता लगाना, घर-घर की निगरानी, किसी व्‍यक्ति से जुड़े जोखिम के आकलन के आधार पर उसका होम/संस्थागत क्‍वारंटाइन और नैदानिक प्रबंधन भी शामिल हैं।

सख्त दायरा नियंत्रण को सुनिश्चित करने की आवश्यकता होगी, ताकि आपातकालीन चिकित्सा स्थिति और आवश्यक वस्तुओं एवं सेवाओं की आपूर्ति बनाए रखने को छोड़कर इस जोन के भीतर और बाहर लोगों की आवाजाही न हो सके। कंटेनमेंट जोन के भीतर किसी भी अन्य गतिविधि या कार्य की अनुमति नहीं है।

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