मजदुर दिवस के दिन भी मजदूरों को मिली मायुशि

रीतेश रंजन, आईआईएन/चेन्नई, @Royret

केंद्र सरकार ने विभिन्न प्रदेशों में फंसे हुए प्रवासी मजदूरों, विद्यार्थियों और श्रद्धालुओं के लिए घर वापस जाने का आदेश जारी तो कर दिया। लेकिन यह स्पस्ट नहीं किया है कैसे इन लोगों को वापस भेजा जाया।

हालाँकि गृह मंत्रालय ने यह घोसना की है इन फसे मजदूरों के लिए विशेष ट्रेन सेवा शुरू की जाएगी। तेलंगाना से हटिया के लिए शुक्रवार को ऐसी ही एक ट्रैन को रवाना किया गया।

इस फैसले के बाद से तमिलनाडु में भी लॉक डाउन में फसे लोगों में ख़ुशी की लहर दौड़ गई है लेकिन उनमे इस ख़ुशी के साथ मायुशि भी है। यह खुशी इन लोगों के लिए क्षणिक मात्र है, क्योंकि इन्हें एहसास हो गया सरकार ने आदेश तो जारी कर दिया है लेकिन इनके वापस जाने का माध्यम क्या होगा इस पर अभी संशय बना हुआ है।

कुछ लोग ऐसे भी है जो खुद का वाहन रिज़र्व कर अपने घर को जाने को तैयार है पर उन्हें डर इस बात का है की कही उन्होंने दूसरे राज्य के बॉर्डर पर न रोक दिया जाया। कुछ लोग जो तमिलनाडु सरकार से पास जारी करवाकर अपने घर जा रहे थे उन्हें भी दूसरे राज्य में रोका गया है।

जिनके पास पैसे है वह तो वाहन की व्यवस्था कर भी सकते है पर यहाँ फसे गरीब मजदूरों का क्या होगा। ये मजदुर जिनके पास लॉक डाउन के बाद से खाने का कोई इंतज़ाम नहीं वह घर जाने का जुगाड़ खुद कैसे लगा पाएंगे।

उड़ीशा के मजदूरों का कहना है की वहां की सरकार उन्हें वापस बुलाने के लिए विशेष बस की व्यवस्था कर यही है। इसकी सुचना इनको इनके गावं के प्रधान से मिली है और उनके घरवालों ने इसके लिए फॉर्म भी भर दिए है।

बांकी जो बचे है वो बिहार, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश के रहने वाले है। ये लोग यही आशा कर रहे है की सरकार उनके जाने की व्यवस्था उपलब्ध कराए। अब ऐसे में इन्हें आशा है की केवल केंद्र सरकार, इनके अपने प्रदेश की सरकार और तमिलनाडु सरकार इनके घर वापसी का रास्ता आसान कर सकती है।

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