भैयाजी हमारे घर जाने का टिकट करा दो, भगवान आपका भला करेगा

रीतेश रंजन, आईआईएन/चेन्नई, @Royret

भैया जी हमारा टिकट किसी तरह करा मुझे घर भेज दीजिये मै आपका एहसान कभी नहीं भूलूंगा। यहाँ खाने और रहने को कुछ भी नहीं है, जो पैसे बचे थे वह भी बंदी के दौरान ख़तम हो गए।

अब भूखों मरने से बेहतर है किसी तरह घर पहुंच जाएं, वहां पहुंच हम किसी तरह जी लेंगे। एक 53 साल के व्यक्ति ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझसे यह कहा तो मै थोड़ी देर के लिए ठिठक सा गया।

मन हुआ की उसे कुछ पैसे दे दूं लेकिन जैसे ही पीछे पलट कर देखा तो मजदूरों की लम्बी कतार देखने को मिली। सैकड़ों की संख्या मे प्रवाशी लोग यहां मौजूद थे, इन सब की मदद करना मेरे बस की बात नहीं थी।

जब इनलोगों को पता चला की मै पत्रकार हूँ उसके बाद सभी मेरे पीछे पड़ गए। सब यही कह रहे थे वे जहा काम करते थे उन्हें वहां से निकाल दिया गया। किसी के पास पैसे नहीं थे इसलिए किराये के घर में भी नहीं रह सकते।

लॉक डाउन कब तक खुलेगा इसके बारे में किसी को कुछ नहीं पता और इस असमंजस की स्थिति में सबसे ज्यादा परेशानी प्रवासी मजदूरों को हो रही है। यही कारन है की टीवी चैनलों और अखबारों में ऐसे लोगों की खबरे रोजाना देखने को मिलती होंगी।

कुछ लोग सड़क पर पैदल, तो कुछ टैंकर व ट्रक में भर कर, तो कुछ साइकिल से ही अपने घर जाने के लिए निकल पड़े है और कुछ ऐसे है जो अभी भी श्रमिक ट्रैन के भरोसे है की शायद उनका नंबर आ जाए। तमिलनाडु में भी कमोबेश स्थिति ऐसी ही है। यहाँ भी प्रवासी मजदुर अपने गावं जाने का इंतज़ार कर रहे है।

तमिलनाडु सरकार ने प्रवाशी मजदूरों को भेजने के लिए एक ऑनलाइन आवेदन और टोल फ्री नंबर जारी किया है जिसपर ये प्रवाशी मजदुर अपना रजिस्ट्रियन करा सकते है। उसके बाद इन पजीकृत लोगों को अनिवार्यता के अनुसार उनके लिए टिकट की व्यवस्था की जाएगी।

सबको एक बात का आसरा है की कब उनका नंबर आये और ट्रेन पकड़ अपने घर चले जाएं। जैसे की घर जाने के बाद इनकी सारी समस्याओं का अंत हो जाएगा।

इनमे से कई ऐसे भी थे जिन्होंने अपना नाम पंजीकृत करा रखा है लेकिन उनका नंबर अबतक नहीं आया। घर और आमदनी नहीं होने के कारन ये लोग स्टेशन आ गए इस आस में की शायद इन्हे ट्रेन की टिकट मिल जाए।

भीड़ को पुलिस स्टेशन के पास आने नहीं देती जिनके पास टिकट का कन्फर्मेशन मेसेज है उन्हें ही स्टेशन जाने दिया जाता है। इनमे से कइयों ने दिनभर से कुछ खाया भी नहीं था।

इस बीच एक एसयूवी गाडी आयी जिसमे से एक सज्जन निकले और उन्होंने इन मजदूरों को खाना और पानी दिया। शाम होने पर इनलोगो को पुलिस बस में भर उनके इलाके छोड़ आई।

लेकिन उनमे से कुछ लोगों ने हमे फ़ोन कर यही कहा की भैयाजी हम वापस स्टेशन आ रहे कल आपसे फिर मुलाकात होगी बस हमारा जाने का टिकट करवा दो।

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