बदायूं में नीलकंठ महादेव बनाम जामा मस्जिद मामले में अगली सुनवाई 3 दिसंबर को
सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट में चल रही है सुनवाई

INN/New Delhi, @Infodeaofficial
बदायूं में जामा मस्जिद बनाम भगवान नीलकंठ महादेव मंदिर मामले में वाद की पोषणीयता को लेकर 30 नवंबर को बदायूं जिला न्यायालय के सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट सुनवाई हुई । जिसमें जामा मस्जिद की ओर से इंतजामिया कमेटी ने अपना पक्ष रखा और कोर्ट में बहस की। बहस पूरी न होने की वजह से फिलहाल अगली तारीख 3 दिसंबर तय कर दी थी। फिलहाल वाद की पोषणीयता को लेकर जिला कोर्ट में सुनवाई चल रही है।
वहीं पूरे केस में अब तक सरकार की तरफ से डीजीसी संजीव वैश्य अपना पक्ष रख चुके हैं और अब आज इंतजामिया कमेटी और बक्फ बोर्ड ने अपना पक्ष कोर्ट के सामने रखा है। आगे तीन दिसंबर को भी जामा मस्जिद की ओर से इंतजामिया कमेटी अपना पक्ष रखेगी। इंतजामिया कमेटी की बहस पूरी होने के बाद अगली सुनवाई में हिन्दू पक्ष के अधिवक्ता अपनी दलील पेश कर सकते हैं। फिलहाल 30 नवंबर को इस केस में सुनवाई के बाद अगली तारीख निर्धारित कर दी गई थी , जिसमें कल यानी तीन दिसंबर को इंतजामिया कमेटी की ओर से न्यायालय में बहस की जानी है।
क्या है पूरा मामला
अखिल भारत हिंदू महासभा के प्रदेश संयोजक मुकेश पटेल आदि द्वारा अदालत में किए गए दावे के मुताबिक शहर में स्थित जामा मस्जिद पूर्व में राजा महीपाल का किला था। यहां नीलकंठ महादेव का मंदिर था। मस्जिद की मौजूदा संरचना नीलकंठ महादेव के प्राचीन मंदिर को ध्वस्त करके बनाई गई है। साल 1175 में पाल वंशीय राजपूत राजा अजयपाल ने इस मंदिर का जीर्णोंद्धार कराया था। मुगल शासक शमसुद्दीन अल्तमश ने इसे ध्वस्त करके जामा मस्जिद बना दिया। इसका नक्शा समेत सरकारी गजेटियर भी कोर्ट में पेश किया गया है।
ये है मुस्लिम पक्ष का दावा
इंतजामिया कमेटी के सदस्य व अधिवक्ता असरार अहमद मुस्लिम पक्ष के वकील हैं। उनके मुताबिक जामा मस्जिद शम्सी लगभग 840 साल पुरानी है। मस्जिद का निर्माण शमसुद्दीन अल्तमश ने करवाया था। यहां मंदिर का कोई अस्तित्व नहीं है। और जिन लोगों ने वाद दायर किया है उन्हें वाद दायर करने का हक ही नहीं है।

