पुष्कर मेला सैलानियों के लिए बना आकर्षण का केन्द्र

INN/Pushkar, @Infodeaofficial

नौ नवंबर से शुरू हुआ पुष्कर मेला सैलानियों के लिए आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। पशु मेले के साथ साथ यहां आधात्म के सरोवर में डूबकी लगाने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। तो रंगीन रोशनी में नहाए मेला ग्राउंड पर पर्यटकों की भीड इस मेले का उत्साह साफ बयां करती नजर आ रही है।

धार्मिक मान्यता है कि कार्तिक मास की पूर्णिमा के दिन पुष्कर सरोवर में स्नान विशेष महिमा है। देव उठनी एकादशी से यहां पुष्कर मेला पुष्कर मेला शुरू हो जाता है। इसमें शामिल होने के लिए देश दुनिया से श्रद्धालु राजस्थान पहुंचते हैं और पुष्कर सरोवर में स्नान करते हैं। मान्यता है कि यहां देव उठनी एकादशी से पूर्णिमा तक प्रवास कर कार्तिक पूर्णिमा पर पुष्कर सरोवर में स्नान से हर मनोकामना पूरी होती है। माना जाता है कि यहां स्नान करने से पंचतीर्थों के दर्शन का फल एक ही बार में मिल जाता है। पुष्कर स्नान के पीछे यह भी मान्यता है कि जो चार धाम की यात्रा करने के बाद पुष्कर तीर्थ में आकर स्नान नहीं करता है उसकी चार धाम यात्रा अधूरी मानी जाती है। पुष्कर सरोवर में आस्था की डूबकी लगाने के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम जुट गया।

पुष्कर में इन दिनों बड़ी संख्या श्रदालु पूरे माह पवित्र सरोवर में आस्था की डुबकी लगाते नजर आते है। यहां हरेक घाट की अपनी खासियत है। साधुसंतों के साथ अल सुबह सरोवर के मुख्य घाटों पर श्रदालुओं का जमावड़ा होने लगता है। प्रतिदिन श्रदालु आस्था की डुबकी लगाने के बाद वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पवित्र सरोवर की पूजा-अर्चना करते नजर आते है। लोगों का मानना है कि इस पवित्र सरोवर में स्नान करने से मन को शांति मिलती है और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

अपने चहल-पहल भरे बाज़ार, पशु मेला, ऊंट दौड़, लोकनृत्यों और जीवंत सांस्कृतिक प्रदर्शनों के लिए मशहूर यह मेला दुनिया भर से पर्यटकों को आकर्षित करता है। पुष्कर मेला सिर्फ एक मेला नहीं है, यह एक सांस्कृतिक उत्सव है जो भारत के सबसे खूबसूरत रेगिस्तानी शहरों में से एक में परंपरा, आध्यात्मिकता और उत्सव के उत्साह को एक साथ लाता है। देर शाम रंग बिरंगी रोशनी में मेले के बाजारों में जहां खरीदारों में उत्साह है तो बेहतर बिक्री के कारण दूकानदार भी खुश नजर आ रहे है। लोगों को हर साल इस मेले का इंतजार होता है, नौ नवंबर से शुरू हुआ पुष्कर मेले का समापन भले ही पन्द्रह नवंबर को होगा।

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