विकास गतिविधियों में लोगों की भागीदारी महत्वपूर्ण रही है: उपराष्ट्रपति

आईआईएन/नई दिल्ली, @Infodeaofficial

पराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू ने लोक सेवकों से स्वच्छ भारत, प्रति बूंद अधिक फसल और कौशल भारत जैसे जन-केंद्रित कार्यक्रमों के प्रतिपादन में सुधार लाने का आग्रह किया है ताकि विकास के लाभ सर्वाधिक योग्य व्यक्ति तक पहुंच सकें।

आज नई दिल्ली में भारतीय लोक प्रशासन संस्थान की आम सभा की 65वीं वार्षिक बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि विकास गतिविधियों में लोगों की भागीदारी महत्वपूर्ण रही है।

स्वच्छ भारत सामाजिक परिवर्तन का एक उत्कृष्ट उदाहरण रहा है और इसे लोगों की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से असाधारण परिणामों तक पहुंचाया गया है। उन्होंने कहा कि “इसी तरह के दृष्टिकोणों को अधिकांश सामाजिक परियोजनाओं में मजबूत भरोसे के साथ अपनाए जाने की आवश्यकता है।”

उपराष्ट्रपति ने कहा कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से जमीनी स्तर पर परिवर्तन के प्रारम्भिक दृष्टिकोण ही समावेशी विकास प्राप्त करने का सबसे बेहतर तरीका है। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा पूर्ण स्वराज को प्राप्त करने के लिए अपनाए गए प्रस्तावित दृष्टिकोण के ही समान था।

पूर्ण स्वराज के लिए गांधीजी के अतिव्यापी दृष्टिकोण से ही प्रशासनिक सुधार और प्रशासन में बदलाव के अथक प्रयासों के लिए प्रेरणा मिल सकी। उन्होंने कहा कि गांधी जी के रचनात्मक कार्यक्रम का प्राथमिक उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए बुनियादी स्वतंत्रता के साथ-साथ शांतिपूर्ण और अच्छा गुणवत्तापूर्ण जीवन सुनिश्चित करना था।

आईआईपीए के पदेन अध्यक्ष तौर पर उपराष्ट्रपति ने महात्मा गांधी की 150वीं जयंती का स्मरण करते हुए कहा कि हम सभी को अपने व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में गांधी जी की शिक्षाओं को आत्मसात करने की आवश्यकता है।

विश्व की कई अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में वैश्विक मंदी के बावजूद, भारत की त्वरित आर्थिक प्रगति का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने प्रसन्नता व्यक्त की कि बुनियादी ढांचे के निर्माण और भारत को जोड़ने से संबंधित कार्ययोजनाएं अभूतपूर्व गति से जारी हैं और पहुंच एवं गुणवत्ता दोनों के मामले में जन सेवाओं में सुधार हो रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकार न सिर्फ विकास के प्रति वचनबद्ध रही है बल्कि भारत को एक आकर्षक निवेश गंतव्य बनाने की दिशा में भी सफल रही है, जिसमें प्रत्येक भारतीय को इस परिवर्तन का संवाहक बनाया गया है।

उन्होंने मानव और सामाजिक विकास पर ध्यान केंद्रित करने एवं आयुष्मान भारत कार्यक्रम और प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाई) के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए सरकार की सराहना की।

उन्होंने जनसांख्यिकीय लाभांश को प्राप्त करने और देश को एक उच्च विकास प्रक्षेपवक्र में स्थानांतरित करने के लिए देश की आंतरिक प्रतिभा और ऊर्जा के दोहन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया।

आईआईपीए की भूमिका पर उपराष्ट्रपति ने कहा कि उनकी इच्छा है कि ये संस्थान ज्ञान केन्द्र बनें और परिवर्तनकारी प्रक्रिया में उत्प्रेरणा का कार्य करें। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि केंद्र सरकार के अधिकारियों तक सीमित आईआईपीए प्रशिक्षण का अब राज्य सरकारों और विदेशी सरकारों तक भी विस्तार हो गया है।

उपराष्ट्रपति ने विकास उद्देश्यों को बढ़ाने और कई मंत्रालयों के साथ इसकी विभिन्न पहलों के लिए आईआईपीए की भूमिका की सराहना की। उन्होंने आशा व्यक्त की कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ आईआईपीए का मूल्यांकन सरकार को सभी कार्यक्रमों में प्रभावशीलता और दक्षता में सुधार करने में सहायता प्रदान करेगा।

इस अवसर पर, उपराष्ट्रपति ने भी विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए और विभिन्न प्रकाशनों का विमोचन किया।

इस अवसर पर आईआईपीए के अध्यक्ष श्री टी. एन. चतुर्वेदी, उपराष्ट्रपति के सचिव डॉ. आई. वी. सुब्बा राव, आईआईपीए के उपाध्यक्ष श्री शेखर दत्त, आईआईपीए के निदेशक श्री सुरेन्द्र नाथ त्रिपाठी, आईआईपीए के रजिस्ट्रार श्री अमिताभ रंजन और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।

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