चित्ति अब रील में नहीं रियल में भी दिखेगा: प्रो वी कामकोटि

रीतेश रंजन, आईएनएन/चेन्नई, @Royret
जब तक कि आप किसी मशीन या टेक्नोलॉजी को परत दर परत खोलकर उसे ठीक तरह से समझ नहीं लेते, तब तक उसमें आ रहे विकार और उसके ठीक करने के तरीके पर दक्षता हांसिल नहीं कर पाएंगे। एकदम इसी तर्ज पर इंसानी दिमाग को समझ कर उसमें आ रहे विकार और उसके उपायों को समझने के लिए आईआईटी मद्रास ने मानव भ्रूण मस्तिष्क की विस्तृत 3डी हाई-रिज़ॉल्यूशन छवियां जारी कि है।
इन छवियों को जारी करने का मुख्य उद्देश्य इस जानकारी को मानसिक रोग और उससे संबंधित क्षेत्रों से जुड़े उन लोगों तक पहुंचाना है, जो इससे विषय से जुड़े शोध-परक कार्यों में लगे हुए हैं। निश्चित रुप से यह उनके शोध-परक अध्ययन में सहायक होने के साथ-साथ असरदार खोज करने में भी मददगार साबित होगा। दरअसल अभी यह अपने खोज के पहले चरण में है और सही मुकाम तक पहुंचने के लिए आने वाले दिनों में इसे कुछ और चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
गौरतलब है कि भ्रूण के मस्तिष्क की सबसे विस्तृत 3डी हाई-रिज़ॉल्यूशन छवियां जारी करने के बाद आईआईटी मद्रास इसकी इतनी विस्तृत जानकारी रखने वाला दुनिया का पहला अनुसंधान संगठन बन गया है। आईआईटी मद्रास के सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर द्वारा किया गया यह कार्य वैश्विक स्तर पर अपनी तरह का पहला प्रयोग है, और इसके कारण आज ब्रेन मैपिंग विज्ञान के वैश्विक समूह में भारत का झंडा काफी बुलंद नजर आ रहा है। गौरतलब है कि भारत की इस खोज से आने वाले दिनों में ब्रेन मैपिंग प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में काम कर रहे विश्वभर के कई संगठनो को काफी मदद मिलेगी।
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक दुनिया भर के शोधकर्ताओं के लिए ‘धरणी’ नामक यह डेटा सेट https://brainportal.humanbrain.in/publicview/index.html वेबसाइट पर मुफ्त में उपलब्ध है।
सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर द्वारा विकसित इस अत्याधुनिक ब्रेन मैपिंग तकनीक का उपयोग करके 5,132 मस्तिष्क खंडों को डिजिटल रूप से कैप्चर किया गया है और निश्चित रूप से यह कार्य तंत्रिका विज्ञान के क्षेत्र में नए शोधों के लिए नए रस्ते खोलने के साथ-साथ संभावित रूप से मस्तिष्क को प्रभावित करने वाली स्वास्थ्य स्थितियों को समझने और उसका उपचार ढूंढने में काफी मददगार सिद्ध होगा।
एक आसान भाषा में समझाया जाये तो जैसे सैटेलाइट इमेज कि मदद से हम गूगल मैप के माध्यम से दुनिया में किसी कोने का चित्र बड़ा कर अपने उपकरण में देख लेते है, उसकी प्रकार से आईटी मद्रास द्वारा विकसित इस तकनीक कि मदद से ब्रेन के इमेज की विस्तृत स्टडी की जा सकती है। इस इमेज की मदद से भ्रूण से लेकर बच्चे, किशोरावस्था और युवा वयस्क तक के मस्तिष्क के विकास तथा सीखने संबंधी विकलांगता और ऑटिज्म जैसे विकारों को समझने में काफी आसानी मिलेगी।
इस तकनीक से मनुष्य में होने वाले रोग विशेषकर के मष्तिस्क से जुड़े रोग को समझने और उसे दूर करने के तरोको कि खोज में काफी मदद मिलेगी। उम्र बढ़ने के कारन होने वाले रोग, मनोविज्ञान इससे सम्भंदित शोध में इससे काफी मदद मिलने वाली है। इसके अलावा आने वाले दिनों में जेनेटिक बिमारियों और उससे बचाव के तरीकों पर काम करने में इसे काफी मदद मिलेगी।
चित्ति अब रील में नहीं रियल में भी दिखेगा

इस तकनीक को और विस्तृत और श्रेष्ठा बनाने को लेकर कई चुनौतियां हाई जो रस्ते की बाधा है। इसमें सबसे बड़ी चुनौती इस अध्ययन के लिए मस्तिष्क की उपलब्धतता उसके स्टोरेज, परिक्षण के साथ साथ इससे जुडी तकनीक और साइबर स्टोरेज को लेकर हैं। इतना सारा डाटा क्लाउड में उपलोड और डाउनलोड करने के लिए तेज इंटरनेट की जरुरत पड़ेगी। एक फीटल ब्रेन का डाटा 10 से 100 टेराबाइट का होता हैं और वही व्यसक के मस्तिष्क का डाटा पीटाबाइट में होता हैं। (1000 टेराबाइट = 1 पीटाबाइट)। इसके अलावा इस शोध में लाखों करोड़ रूपये की जरुरत हैं जो आसानी से उपलब्ध नहीं हैं।

