संजय दत्त के जीवन संघर्ष के पन्ने पर सच्ची फ़िल्मी कहानी

सनोबर ज़ाकिर, आईएनएन/नई दिल्ली, @infodeaofficial 

र इंसान के जीवन में कोई ना कोई एक ऐसा पहलू आता है जो उसे बुरा करने पर मजबूर कर देता है, लेकिन इसका ये मतलब नहीं की वो इंसान बुरा है. जैसे की हम जानते है की बॉलीवुड मे संजय दत्त की छवि अच्छी नहीं थी. लोग उन्हें क्रिमिनल ज़्यादा और हीरो कम मानते थे.

इसलिए उनकी असल जिंदगी को सबके सामने लाने के लिए राज कुमार जी जो बॉलीवुड के बेहतरीन डायरेक्टर मे से एक है, उन्होंने उनपर एक बायोपिक बनायी. उन्होंने कहा की बहुत बड़ा दिल चाहिए होता है अपनी ज़िन्दगी को पुरे देश को दिखाने का जो संजय दत्त मे था.

इस मूवी मे रणबीर कपूर को लिया गया है जिन्होंने अपना किरदार बखूबी निभाया है. इस मूवी मे सारे पहलू दिखाए गए है जो दुनिया जानती थी पर उससे जुडी पीछे की कहानी को देखना होगा. जैसा की हम जानते हैं वो ड्रग लेते थे, पर क्यू ये इस मूवी मे बताया गया और साथ ही साथ उनके निजी ज़िन्दगी से जुड़े जितने भी मामले थे वो सब को फिल्माया गया है जैसे 1993 मे हुए मुंबई बम ब्लास्ट मे उनको सजा सुनाई गयी जहाँ उनके साथ जेल मे बुरा बर्ताव किया गया साथ ही साथ Ak-56 रखने के लिए 5 साल की सज़ा सुनाई गयी.

कम बैक फिर फिल्म,संजय दत्त को हर बार इन मामलो मे फॅसाया गया और वो ख़ुशी- ख़ुशी स्वीकार करते गए. वहां उन्होंने कई बार अपने आप को जान से मारने की कोशिश की. लेकिन इन सब मे भी उनके पिता सुनील दत्त ने मरते दम तक साथ दिया जो इस मूवी मे दिखाया गया है और साथ ही साथ दोस्ती की नयी मिसाल खड़ी की जहाँ एक दोस्त ने उसको बिगाड़ दिया और दूसरी ओर एक दोस्त ने उसको सही राह दिखाई. 

इसी के साथ हम इस निष्कर्ष पर पहुंचते है की परिवार के लिए किया गया काम कभी बुरा नहीं माना जाता और यही हमें संजय दत्त की ज़िन्दगी से सीखने को मिलता है. इस मूवी ने लोगो के दिलो दिमाग़ से उनकी बुरी छवि को मिटा दिया तथा उन्होंने अपनी ज़िन्दगी को सफलता की नयी रौशनी से भर दिया .

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