डा. रामदास ने मुझे राजनीति में आने के लिए किया प्रेरित: सैम पॉल

आईआईएन/चेन्नई, @Infodeaofficial  

मेरी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष से नहीं बल्कि मेरी लड़ाई भ्रष्टतंत्र से है। मै जिस प्रत्याशी के विरोध में उतरा हुं उसपर भले ही भ्रष्ट्राचार के आरोप लगे हो लेकिन मेरा मानना है कि भ्रष्टाचार को जन्म भ्रष्टतंत्र ही देता है इसलिए जरूरम है कि हम इस भ्रष्ट तंत्र को खत्म करें। हम 21वीं सदी में जी रहे हैं और व्यवस्थाए और तंत्र जो व्यवहार में ला रहे हैं वह अभी भी 18वीं सदि की है, जिसमें बदलाव लाने की जरूरत है। मै राजनीति में आने का मकसद इसी बदलाव को लाना हैं। इंफोडिया ने सेंट्रल चेन्नई के प्रत्याशी सैम पॉल से उनके चुनावी अभियान और उद्देश्य को लेकर विशेष बातचीत की। प्रस्तुत है उसके विशेष अंश।

इंफोडिया: एक बिजनसमैन को राजनीति में रुचि कैसे आई?
सैम पॉल: मै बचपन से सामाजिक व्यक्ति रहा हुं, यह शिक्षा मुझे मेरे परिवार से मिली है। वर्ष 2015 में बाढ़ ने तमिलनाडु के लोगों को काफी प्रभावित किया और मेरे जीवन को भी। बाढ़ के दौरान लोगों की मदद के लिए मै और मेरे दोस्तों ने मिलकर एक टीम होम का निर्माण किया जो चेन्नई व उसके आस-पास के इलाकों में प्रभावित लोगों की मदद कर रही थी। यह मदद केवल इंसानों के लिए नहीं बल्कि जानवरों के लिए भी थी। उस दौरान लोगों की मदद कर मुझे जो आत्मसंतुष्टि मिली उसकी व्याख्या मै शब्दों में नहीं कर सकता। वही यह मौका था जब मेरे दिल में जनसेवा के प्रति रूचि और बढ़ी।

संवाददाता: अपने पीएमके ही क्यों चुना?
सैम पॉल: मेरी मुलाकात वर्ष 2017 में डा. रामदास से हुई है और मेरी अंदर छिपी जनसेवा की भावना को उन्होंने पहचाना और मुझे राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया। मै डा. रामदास के काम करने के तरीकों और उनकी राजनीति से अपने कॉलेज के दिनों से प्रभावित रहा हुं। उनके साथ उनकी कई योजनाओं पर मैने काम भी किया है। मेरा उनसे निजी लगाव भी मुझे पीएमके के साथ आने का कारण है।

संवाददाता: अबतक आप एक आम इंसान थे कलको आप सांसद होंगे, ऐसे में आम लोगों के लिए क्या बदलाव लाना चाहते हैं?
सैम पॉल: व्यवस्था और तंत्र का काम लोगों की मदद करना होता है लेकिन इसे इतना जटिल कर दिया गया है कि जो लाभ लोगों को मिलना चाहिए वह नहीं मिल पाता। मै राजनीति में आकर उसी व्यवस्था और तंत्र में बदलाव लाना चाहता हुं और यह बदलाव मै अपने संसदीय क्षेत्र से लाना चाहता हुं। अपने व्यस्त जीवन में व्यक्ति को संासद के पास आने का मौका न मिले तो एक एप पर क्लीक कर भी तो वह अपनी समस्याओं के बारे में अपने जनप्रतिनिधि को अवगत करा सकती है। उसके बाद जनप्रतिनिध का काम होता है कि वह वह संबंधित विभाग को समस्या अग्रसारित कर उसका निपटारा कराए। हम २१वीं सदी में जी रहे है लेकिन व्यवस्थाए अब भी पूरानी हैं। हमे उसमें बदलाव करने की जरूरत है। व्यवस्था में प्रोफेसनलिज्म लाने की जरूरत है। सरकारी ऑफिस में काम करने का तरीका कैसा है हमसब उससे अवगत है लेकिन उसमें बदलाव के बारे में कोई चर्चा नहीं करता।

संवाददाता: एक युवा नेता की अपनी अलग सोच होती है, आप अपनी योजनाओं और विचारों के बारे में बताएं?
सैम पॉल: मेरा मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डीजिटल इंडिया को अगले स्तर पर ले जाने का समय आ गया है। सभी सरकारी ऑफिसों में होने वाले काम को डीजिटल फार्म देने की जरूरत है। वहां क्या काम हुआ कौन से काम क्यों किस कारणवश लम्बित हैं। इन सबों में पारदर्शिता लाने की जररूरत है। मै इसकी शुरूआत अपने संसदिय क्षेत्र से करना चाहता हुं। उसके बाद यदि मुझे भविष्य में किसी विभाग का मंत्रीपद बनाया गया तो मै उस विभाग में भी वैसे बदलाव लाने की कोशिस करुंगा। कौन सा पैसा कहां से आया उसे कहां खर्च किया गया। इस बारे में जनता को जानकारी होनी चाहिए। आखिरकार हम सभी जनता की सेवा के लिए यहां है। सरकारी शिक्षा और काम की दिशा और दश को बदलने की बहुत जरूरत है।

संवाददाता: आपके लिए चुनावी मुद्दे क्या हैंं?
सैम पॉल: मेरे हिसाब से चुनावी मुद्दे लोगों की रोजमर्रा और भविष्य से जुड़े होने चाहिए। मेरे लिए प्रमुख मुद्दा सरकारी और सामाजिक व्यवस्था में बदलाव लाना है। मै चाहता हुं कि सरकारी स्कूलों की स्थिति में सूधार हो और आम व गरीबजन के बच्चों को गुणवत्तापरक शिक्षा मिले। वहीं सरकारी अस्पतालों में लोगों को विश्वस्तरीय सुविधा के साथ उनका ईलाज हो। वहीं महिलाओं के लिए समाज में सुरक्षित वातावरण तैयार किया जाय। जिससे न घर, ऑफिस, सडक़ व गली, भीड़ व सूनसान इलाके में उनके साथ कोई गलत व्यवहार न हो। महिलाओं के खिलाफ बढ़ रही हिंसा पर पूर्णविराम लगाया जाय।

संवाददाता: कई मसलों पर पीएमके और भाजपा की विचारधारा नहीं मिलती, पीएमके ने केंद्र सरकार की कई योजनाओं का राज्य में खुलकर विरोध किया है। आपकी इस बारे में क्या राय है?
सैम पॉल: कोई राजनीतिक पार्टी एक सथ तभी आती है जब उनकी विचारधाराएं मिलती हों। हां कई मुद्दों और बातों पर मतभेद हो सकता है, इस बात से कतई इंकार नहीं किया जा सकता। घर में ही एक ही मां-बाप की दो संतानों में मतभेद होता है, इससे लोग घर तो बदल नहीं लेते। पीएमके का एनडीए के साथ आने का मकसद एक ही है राष्ट्र का विकास। एनडीए सरकार के अच्छे कार्य और योजनाओं की सराहना और मदद से हम हर कदम उनके साथ रहेंगे तो वहीं उनके गलत नीतियों की आलोचना में भी हम पीछे नहीं रहेंगे।

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