आज का समय, विज्ञान और प्रौद्योगिकी का समय: द्रौपदी मुर्मू

INN/Puri, @Infodeaofficial
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अपने यात्रा के दुसरे दिन ओडिशा के पुरी स्थित गोपबंधु आयुर्वेद कॉलेज के 75वें स्थापना दिवस के अवसर पर, बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुई जहां उन्होंने कहा कि आज का समय, विज्ञान और प्रौद्योगिकी का समय है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, क्वांटम कंप्यूटिंग, 3-डी प्रिंटिंग, कोडिंग आदि विषय, आज के अध्ययन और विकास दोनों में सहायक हो रहे हैं। अतः हमें वर्तमान को ठीक से पहचानने की जरूरत है।
वर्तमान को पहचानकर ही हम भविष्य की रूपरेखा तैयार कर सकते हैं। परंतु अपने अतीत को जाने बिना, हम वर्तमान को नहीं समझ सकते हैं, न ही भविष्य की कार्यप्रणाली को निश्चित कर सकते हैं। हमारा अतीत गौरवशाली है। हमें इसके बारे में जागरूक होना चाहिए। यहां केवल वेदों, उपनिषदों तथा रामायण-महाभारत जैसे महाकाव्यों की रचना नहीं हुई है।
भारत में भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, खगोल विज्ञान, ज्योतिष शास्त्र, चिकित्सा शास्त्र, गणित, वास्तुकला तथा युद्ध एवं खेलकूद जैसी अनेक कलाओं से जुड़ी एक समृद्ध परंपरा रही है। विज्ञान के क्षेत्र में आर्यभट, ब्रह्मगुप्त, वराहमिहिर और भास्कराचार्य आदि वैज्ञानिकों के दिशा-निर्देश से विश्व का ज्ञान-विज्ञान का भंडार समृद्ध हुआ है। इसी प्रकार चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में चरक और सुश्रुत का योगदान उल्लेखनीय है।
आप जिस आयुर्वेद का अध्ययन यहां कर रहे हैं, यह हमारी प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति का ही विस्तार है। यह खुशी की बात है कि विगत एक दशक में हमारी इस प्राचीन चिकित्सा पद्धति को अधिक लोकप्रिय बनाने के प्रयास किए गए हैं। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय में आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध आदि पर बल दिया गया है। भारत सरकार की पहल पर संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया है। यह योग दिवस दुनिया के अलग-अलग देशों में प्रति वर्ष उत्साह के साथ मनाया जाता है। अर्थात्, भारतीय चिकित्सा प्रणालियों के प्रति देश और दुनिया का दृष्टिकोण बदल रहा है।

